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सीनेट के चुनावों से पीपीपी का हौसला मजबूत

४ मार्च २०१२

पाकिस्तान में सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की स्थिति सीनेट के चुनावों से मजबूत हो गई है. शनिवार को जारी शुरुआती नतीजों ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मुश्किलो में घिरी सरकार को बल दिया है.

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गिलानी की पीपीपी पार्टी मजबूततस्वीर: AP

शुक्रवार को राष्ट्रीय संसद के ऊपरी सदन सीनेट की 45 सीटों के लिए हुए चुनावों में बड़ी कामयाबी पीपीपी के हिस्से आई है. इन चुनावों में पीपीपी को 19 सीटें मिली है. इसके साथ ही कुल 104 में से अब 41 सीटें पीपीपी के पास हो गई हैं. गैरआधिकारिक तौर पर सामने आए नतीजों ने इस कमजोर सरकार का मनोबल बढ़ा दिया है. कहां तो हालात यह थे कि हर दिन नई मुश्किलों में घिरती सरकार के लिए संसदीय चुनाव जल्दी कराए जाने की चर्चा गर्म होने लगी थी.

एक तरफ तालिबान और अल कायदा से जंग है तो दूसरी तरफ मेमोगेट कांड की वजह से सेना की नाराजगी. अमेरिका के साथ रिश्तों में जो तनाव चल रहा है उससे तो दुनिया वाकिफ ही है. पिछले महीने देश की सर्वोच्च अदालत ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी पर अवमानना का आरोप लगा दिया हालांकि वो इससे इनकार कर रहे है. इन सब मुश्किलों के बीच कुछ अच्छी खबर इन चुनावों ने ही दी है.

इन चुनावों में नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली प्रमुख विपक्षी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज पार्टी ने आठ सीटें हासिल की है जिन्हें क्षेत्रीय एसेंबली के सदस्यों ने चुना है. कराची की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट प्राटी को भी चार सीटें मिली हैं. उत्तर पश्चिमी अफगानिस्तान की सीमा पर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह में राज करने वाली अवामी नेशनल पार्टी ने छह सीटों पर कब्जा जमाया है. बाकी बची सीटें क्षेत्रीय और धार्मिक पार्टियों के हिस्से आई हैं. चुनाव के इन नतीजों की आधिकारिक रूप से अगले हफ्ते पुष्टि होगी.

पाकिस्तान में संसदीय चुनाव 2013 में होने हैं. विपक्षी पार्टियां सरकार पर भ्रष्टाचार, खराब आर्थिक हालत और ऊर्जा संकट की समस्या से जुड़े आरोप लगा कर समय से पहले चुनाव कराने की मांग कर रही हैं. पाकिस्तान के चार बड़े प्रांतों में से हर में प्रांत के हिस्से में सीनेट की 23 सीटें हैं. इसके बाद चार सीटें राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद के हिस्से में हैं जबकि उत्तर पश्चिम के कबायली इलाकों के पास आठ सीटें हैं.

सीनेट की कुछ सीटें गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों, महिलाओं, इस्लामी विद्वानों और विज्ञान विशेषज्ञों के लिए सुरक्षित हैं. सीनेट के मौजूदा 100 सदस्यों में से आधे इसी महीने की 12 तारीख को छह साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद रिटायर हो जाएंगे. चार गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए इस बार की सीनेट में पहली बार विस्तार करके जगह बनाई गई है.

रिपोर्टः एएफपी/एन रंजन

संपादनः आभा एम