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पूरी दुनिया में अमेरिकी सुरक्षा बढ़ी

१२ सितम्बर २०१२

लीबिया में अमेरिकी राजदूत की मौत के बाद पूरी दुनिया में अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने साथ ही धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले कदम की भी निंदा की है. फिल्म के विरोध में हुई हिंसा.

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तस्वीर: dapd

लीबियाई शहर बेनगाजी में राजदूत क्रिस स्टीवेंस और तीन अन्य अमेरिकियों के मारे जाने के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गहरे दुख का इजहार करते हुए कहा, "मैंने अपने प्रशासन से कहा है कि वे लीबिया में हमारे लोगों को ज्यादा सुरक्षा और संसाधन उपलब्ध कराएं. हमने पूरे विश्व में अपने राजनयिक ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने को कहा है."

मंगलवार को जब बेनगाजी में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ, तो राजदूत स्टीवेंस और दूसरे लोगों को वहां से हटाया जा रहा था. तभी उनकी कार पर रॉकेटों से हमला हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के दफ्तर से जारी बयान में कहा गया है कि स्टीवेंस के अलावा शॉन स्मिथ नाम के राजनयिक की जान गई है. इसके अलावा दो राजनयिकों के नाम नहीं बताए गए हैं, जबकि उनके घर वालों को सूचना दे दी गई है.

Libyen Bengasi Anschlag auf US-Konsulat
तस्वीर: Reuters

फिल्म के खिलाफ गुस्सा

लीबिया के एक अधिकारी का कहना है कि यह हमला उस फिल्म के खिलाफ हुआ है, जो कथित तौर पर इस्लाम धर्म के संस्थापक के खिलाफ बनाई गई है. राष्ट्रपति ओबामा ने इस हमले की निंदा की, "मैं कड़े शब्दों में उस हमले की निंदा करता हूं, जो बेनगाजी में हमारे राजनयिक ठिकाने पर हुआ और जिसमें राजदूत क्रिस स्टीवेंस सहित चार अमेरिकियों की मौत हो गई."

बेनगाजी वही शहर है, जहां पिछले साल कर्नल मोअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ था. विद्रोह शुरू होने के बाद स्टीवेंस बेनगाजी पहुंचने वाले शुरुआती विदेशी राजनयिकों में शामिल थे. हालांकि इस हमले का संबंध लीबिया के विद्रोह से नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है. लीबिया के अधिकारियों का कहना है कि इस्लाम के खिलाफ बनी फिल्म के विरोध में अमेरिकी प्रतिष्ठान पर हमला हुआ.

राष्ट्रपति ओबामा का कहना है, "अमेरिका दूसरों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करता है. लेकिन साथ ही उन कदमों की भी उतनी ही शिद्दत से निंदा करता है, जिसके तहत अंधी हिंसा में सरकारी कर्मचारियों की जान ले ली जाती है."

फिल्म का मामला

यह पूरा मामला एक अंग्रेजी फिल्म "इन्नोसेंस ऑफ मुस्लिम्स" से शुरू हुआ. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल का दावा है कि यह फिल्म इस्राएली अमेरिकी सैम बेसाइल ने बनाई है, जिसमें इस्लाम धर्म के संस्थापक को कथित तौर पर दुराचार करने वाला बताया गया है. फिल्म के किरदारों के बोलने का लहजा अमेरिकियों की तरह है. जबकि मिस्र का दावा है कि फिल्म बनाने के क्रम में कुछ मिस्री लोगों की भी मदद ली गई है.

J. Christopher Stevens
हमले में क्रिस स्टीवेंस की मौततस्वीर: AP

52 साल के बेसाइल ने एक इंटरव्यू के दौरान इस्लाम को नफरत फैलाने वाला धर्म बताया, "इस्लाम कैंसर की तरह है." हालांकि इस फिल्म के तैयार होने के बाद भी इसका कोई जिक्र नहीं हो रहा था. लेकिन तभी अमेरिकी पादरी टेरी जोन्स ने इसका प्रचार शुरू कर दिया. जोन्स वही पादरी हैं, जिन्होंने पिछले साल 9/11 के मौके पर कुरान जलाने की तैयारी की थी. हालांकि बाद में उन्होंने ऐसा नहीं किया.

बेसाइल का कहना है कि 60 अदाकारों और 45 क्रू मेंबर के साथ उन्होंने पिछले साल अमेरिका के कैलिफोर्निया में यह फिल्म बनाई है. उनका दावा है कि 100 यहूदी लोगों ने 50 लाख अमेरिकी डॉलर की आर्थिक मदद की.

इस्राएल ने की निंदा

हालांकि यहूदी मुल्क इस्राएल ने इस बात से इनकार किया है कि फिल्म से उसका कुछ लेना देना है. इस्राएल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ईगाल पालमर ने कहा कि "इस फिल्म का इस्राएल से कुछ लेना देना नहीं है." हालांकि उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद इस्राएल चौकन्ना है.

एक वरिष्ठ इस्राएली रब्बी ने इस फिल्म को "कूड़ा" बताया है. लंबे समय से धर्मों के बीच बातचीत को बढ़ावा दे रहे माइकल मेलकोयर ने कहा, "हालांकि अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए और तंज कसने की भी आजादी होनी चाहिए लेकिन इस स्वतंत्रता के बिना पर कूड़ा कचरा नहीं पेश किया जाना चाहिए."

उन्होंने कहा, "सैम बेसाइल खुद को यहूदी और इस्राएली कहते हैं और कहते हैं कि आतंक के खिलाफ युद्ध के तहत उन्होंने यह फिल्म बनाई. लेकिन सच यह है कि इससे करोड़ों मुसलमानों की भावनाएं बुरी तरह आहत होती हैं."

यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म मानने वालों की जड़ें एक ही हैं. मेलकोयर का कहना है, "एक यहूदी और रब्बी होने के नाते मुझे शर्म आ रही है कि इस फिल्म में किस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया है." उन्होंने इसे तौरात (यहूदी धार्मिक किताब) के सिद्धांतों के खिलाफ बताया.

एजेए/एमजे (एएफपी, रॉयटर्स, एपी, डीपीए)