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असम में हालात ख़राब, 32 की मौत

कुलदीप कुमार, नई दिल्ली६ अक्टूबर २००८

असम में हिंसा की वजह से पिछले तीन दिनों में 32 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 80,000 से ज़्यादा लोगों को घर बार छोड़ कर भागना पड़ा है. सेना की तैनाती के बावजूद स्थिति पर क़ाबू नहीं पाया जा रहा है.

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सेना की तैनातीतस्वीर: AP

पिछले तीन दिनों से उत्तरी असम के उदलगुडी और दारांग जिलों में जातीय हिंसा का तांडव जारी है. बोडो आदिवासियों और बांग्लादेश से आए लोगों के बीच हो रहे हिंसक संघर्ष में अब तक कम से कम 32 लोगों के मारे जाने की ख़बर है. हिंसा और आगज़नी के कारण दोनों समुदायों के 80,000 से भी ज़्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए हैं. उन्होंने 36 राहत शिविरों में शरण ले रखी है. ख़बर है कि यह हिंसा अब असम के निचले जिले बक्सा में भी फैलने लगी है.

सैनिक एवं अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है और उन्हें दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए गए हैं. चार स्थानों पर हिंसा को रोकने के लिए उन्हें गोली चलाने पर मजबूर होना पड़ा. राज्य के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई कहते हैं कि जाहिर तौर पर शरारती तत्व हिंसा भड़काने में लगे हैं. सरकार ने एक न्यायिक समिति का गठन किया है और बोडो हों या बांग्लादेश से कानूनी या गैरकानूनी ढंग से आने वाले लोग, अब सभी भारतीय नागरिक हैं. गोगोई कुछ भी कहें, यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाने के बाद भी स्थिति पर अभी तक काबू पाने में विफल रही है.

इस हिंसा के तार बांग्लादेश स्थित आतंकवादी संगठन हरकत उल जेहाद ए इस्लामी यानी हुजी से भी जुड़ते नज़र आ रहे हैं. टीवी समाचार चैनल टाइम्स नाऊ ने दारांग जिले में पाकिस्तान के झंडे फहराए जाने की फुटेज प्रदर्शित किए हैं. मुख्यमंत्री गोगोई इसकी जानकारी से इनकार करते हैं लेकिन साथ ही यह भी कहते हैं कि यदि यह ख़बर सही है तो गंभीर चिंता का विषय है. उधर दिल्ली में बीजेपी प्रवक्ता राजीव प्रताप सिंह रूडी ने इस ख़बर पर भारी चिंता जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान के झंडे फहराए जाने को माफ़ नहीं किया जा सकता.

दरअसल असम में बांग्लादेशियों का लगातार आते रहना कई दशकों से बहुत बड़ी समस्या बना हुआ हैं.