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साहित्य अकादमी ने की लेखकों पर हमले की निंदा

३ अगस्त २०१८

साहित्य अकादमी ने लेखकों के पक्ष में एकजुटता प्रदर्शित करते हुए उन पर होने वाले हमले की कड़ी निंदा की है.

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Symbolbild Lupe auf Buch
तस्वीर: Fotolia/ktasimar

उम्मीद की जा रही है कि अकादमी के इस कदम से 2015 का वाकया दोहराने की नौबत नहीं आएगी जब कई साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं ने अपना अवार्ड लौटा दिया था. दरअसल 26 प्रमुख लेखकों ने पत्र लिखकर अकादमी से गोवा के अवार्ड विजेता लेखक दामोदर मौजो और मलयालम उपन्यासकार एस हरीश को बार-बार मिल रही धमकियों की निंदा करने का आग्रह किया था.

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने बेंगलुरु से आईएएनएस से टेलीफोन पर बातचीत में कहा, "मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अकादमी लेखकों के खिलाफ सभी हमलों की निंदा करती है. मैं मौजो व हरीश से जुड़ी खबरों से दुखी हूं. मैं कड़े शब्दों में इन धमकियों की निंदा करता हूं."

81 वर्षीय कंबर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हरीश जैसे लेखकों को मिल रही धमकियों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करेंगे, "मैं संबंधित मंत्री (संस्कृति मंत्री महेश शर्मा) से बात करने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन वह उपलब्ध नहीं हैं." उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा, "अकादमी स्वतंत्र आवाज का समर्थन करती है और मुझे इसमें कोई संकोच नहीं होगा."

अकादमी इस बार भले ही फौरन हरकत में आ गई है लेकिन लेखक एमएम कल्बुर्गी, गोविंद पनसरे और नरेंद्र दाभोल्कर की हत्या की निंदा करने में उसे 54 दिन लग गए थे. इस पर कंबार ने कहा, "बीती बातों को भूल जाइए. हम सब कुछ अपनी क्षमता से कर रहे हैं और हमने पहले ही इस पर अपना रुख जाहिर कर दिया है कि हम एस हरीश और दामोदर मौजो पर हमले की निंदा करते हैं."

अकादमी ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से गुरुवार की दोपहर अपनी बात दोहराते हुए कहा, "वह न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में लेखकों, विचारकों और कवियों पर होने वाले सभी हमलों की निंदा करती है." कंबार द्वारा हस्ताक्षरित साहित्य अकादमी की विज्ञप्ति में कहा गया, "साहित्य अकादमी इन हमलों की कड़ी निंदा करती है और लेखकों के साथ खड़ी है."

भारतीय लेखक मंच के बैनर तले जिन कद्दावर व अवार्ड विजेता लेखकों ने अकादमी को पत्र लिखकर इन हमलों की निंदा करने का आग्रह किया उनमें नयनतारा सहगल, केकी दारुवाला, के सच्चिदानंद, रीतू मेनन, जेरी पिंटो और मीना अलेक्जेंडर शामिल हैं. लेखक मंच ने बताया कि 2015 में अकादमी साहसिक व सार्वजनिक रुख अपनाने में विफल रही थी.

अकादमी के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कवि केकी दारुवाला ले कहा, "यह प्रशंसनीय खबर है." दारुवाला उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने 2015 में अपना साहित्य अकादमी अवार्ड लौटा दिया था. उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मैं खुश हूं कि 2015 जैसी स्थिति नहीं दोहराई गई. हमने अपना काम कर दिया है. मैं अकादमी के मुखर होने की प्रशंसा करता हूं, खासतौर से श्री कंबार के कदम की सराहना करता हूं जिन्होंने 2015 की तरह चुप रहने जी जगह मसले पर तत्काल संज्ञान लिया."

इस बीच सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि किताबों पर प्रतिबंध लगाने की संस्कृति से विचारों के स्वतंत्र प्रवाह पर असर होगा और इसका सहारा तब तक नहीं लेना चाहिए जब तक वह भारतीय दंड संहिता की धारा 292 के तहत न आता हो जिसमें अश्लीलता पर रोक है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने हरीश द्वारा 'मीशा' से कुछ अंश को हटाने की मांग करते हुए दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

आईएएनएस/आईबी

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