चीन ने कहा है कि इंटरनेट कंपनी गूगल अगर जाना चाहे तो जा सकता है लेकिन उसके क़ानून में कोई बदलाव नहीं होगा. गूगल कह चुका है कि वह चीन के सेंसरशिप क़ानून और उसकी वेबसाइट में दख़ल देने को बर्दाश्त नहीं करेगा.
गूगल ने दो महीने पहले ही इस बात का संकेत दे दिया था कि वह चीन को छोड़ देगा और गूगल डॉट सीएन सेवा को बंद कर देगा. इसके बाद गूगल के शेयरधारकों ने धीरे धीरे शेयर बेचने शुरू कर दिया. गूगल का कहना था कि उसकी वेबसाइट को चीन के अंदर से हैक किया जा रहा है.
चीन में गूगल के शेयर जहां सोमवार को तीन फ़ीसदी नीचे लुढ़क गए, वहीं बायदू डॉट कॉम के शेयर धड़धड़ा कर चढ़ गए. बायदू चीन में पहले नंबर का सर्चइंजन है. गूगल ने अभी तक अपना फ़ैसला जगज़ाहिर नहीं किया है. हालांकि इस बात के संकेत बढ़ने लगे हैं कि वह चीन में अपना कारोबार पूरी तरह बंद कर सकता है.
इस बीच चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना है कि यदि गूगल इस देश में नहीं रहना चाहे तो भी उसे क़ानून का पालन करना चाहिए. प्रवक्ता याओ जियान ने कहा, "गूगल जब 2007 में चीन में आया था, तो उसने साफ़ शब्दों में कहा था कि वह चीन के क़ानून का सम्मान करेगा." गूगल ने चीनी भाषा में अपने पोर्टल की शुरुआत 2006 में की थी. प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि गूगल यदि चीन में बना रहना चाहे या नहीं, लेकिन उनके क़ानून का सम्मान करेगा.
याओ ने कहा कि अगर गूगल अपनी कंपनी चीन में बंद करना चाहे तो भी उसे क़ानून का पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि चीन के नियमों के मुताबिक़ अगर कोई कंपनी चीन में कारोबार बंद करना चाहता है, तो भी उसे विदेश मंत्रालय को बताना चाहिए क्योंकि यह भी चीन का क़ानून है. चीन ने कहा कि अगर गूगल चीन से जाता है तो इससे विदेशी निवेशकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे एकमात्र फ़ैसले से चीन की अर्थव्यवस्था पर असर नहीं पड़ेगा.
रिपोर्टः रॉयटर्स/ए जमाल
संपादनः ए कुमार