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दुनिया

डीएमके हिंदी के ख़िलाफ़ नहीं: करुणानिधि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा है कि उनकी पार्टी डीएमके भाषा के तौर पर हिंदी के ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि वह ग़ैर हिंदी भाषियों पर इसे थोपे जाने का विरोध करती है. साथ ही कहा कि तमिलनाडु में हिंदी की ज़रूरत नहीं.

एम करुणानिधि

चेन्नई में इन दिनों 500 करोड़ रूपये की लागत से तमिलनाडु विधानसभा की नई इमारत बन रही है और बहुत से हिंदी भाषी मजदूर भी वहां काम कर रहे हैं. नए विधानसभा परिसर में इन मजदूरों को संबोधित करते हुए करुणानिधि ने कहा, "हम हिंदी के विरुद्ध नहीं हैं, लेकिन इसे थोपे जाने का विरोध करते हैं. हम नहीं चाहते कि किसी एक भाषा को बोलने वाले दूसरों पर अपना दबदबा क़ायम करें. इसके बजाय उन्हें आपस में संबंध स्थापित करना चाहिए."

राज्य सरकार की तरफ़ से इन मजदूरों के लिए कराए गए कार्यक्रम में हिंदी गाने भी बजाए गए. इस बारे में पूछे जाने पर करुणानिधि ने कहा, "हिंदी गानों के लिए ही ठीक है. वैसे तमिलनाडु उसकी ज़रूरत नहीं है." उन्होंने दावा किया कि बिहार जैसे राज्यों से काम के लिए आने वाले लोगों को तमिल गाने भी ख़ूब पसंद आते हैं.

डीएमके ने 1965 में व्यापक हिंदी विरोधी आंदोलन छेड़ा था और हिंदी के विरोध का झंडा बुलंद कर उसने 1967 में सरकार बनाई. सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार ने स्कूल में छात्रों के लिए दो भाषाओं का फ़ॉर्मूला शुरू किया. हिंदी से बचने के लिए ऐसा किया गया जिसे तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाया गया.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एस गौड़

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