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दुनिया

थाइलैंड सरकार को 24 घंटे की डेडलाइन

रविवार को पूरे थाइलैंड से कई विरोधी प्रदर्शनकारी बैकॉक में जमा हुए और सरकार से 24 घंटो के अंदर इस्तीफ़ा देने की मांग की. साथ ही उन्होंने चुनाव करने की भी मांग रखी है.

रेड शर्ट्स का प्रदर्शन

यूनाईटेट फ़्रंट फॉर डिमॉक्रेसी अंडर डिक्टेटरशिप यूडीडी के समर्थक बैकॉक के राजदम्नोएन एवन्यू में जमा हुए. इस बीच अस्पतालों को एलर्ट पर रखा गया है और विदेशी पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं.30 देशों ने थाइलैंड में यात्रा करने वालों को चेतावनी दी है.

यूडीडी के प्रमुख नेता नातावूत साइकुएर ने कहा है कि अगर

प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजीवा 24 घंटों के अंदर अंदर जवाब नहीं देते तो वे बैंकॉक के बीच से प्रदर्शन निकालेंगे. प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोग ज़्यादातर थाईलैंड के उत्तर और पूर्वोत्तर इलाक़ों से थे. यह क्षेत्र थाइलैंड के सबसे ग़रीब माने जाते हैं. लगभग 2000 बौद्ध भिक्षुओं ने भी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया.

यूडीडी ने कहा है कि 24 घंटों तक अगर वेज्जाजीवा उनकी मांगे पूरी नहीं करते हैं, तो वे बैकॉक के संवेदनशील इलाक़ों में प्रदर्शन करेंगे. इन इलाक़ों में प्राइवी काउंसिल प्रेम तिनसुलानंदा का भी घर है और माना जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री थकसिन शिनावत्र के तख्तापलट के पीछे इन्हीं का हाथ था.

इस बीच प्रधानमंत्री वेज्जाजीवा ने रेड शर्ट्स के नाम से जाने जाने वाले प्रदर्शनकारियों से कहा है कि शांति न भंग करने के लिए वे इनके शुक्रगुज़ार हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि रेड शर्ट्स के कुछ गुट हिंसा पर उतर आ सकते हैं.

अगर स्थिति बिगड़ती है तो वेज्जाजीवा इमर्जेंसी भी लागू कर सकते हैं. इस हालत में सुरक्षा पुलिस के बजाय सीधे सेना की ज़िम्मेदारी होगी. बैंकॉक में इस वक्त स्थिति संभालने के लिए लगभग 35 हज़ार पुलिस और सेना कर्मी तैनात कर दिए गए. इसके अलावा 45 हज़ार से ज़्यादा असैन्य कार्यकर्ता भी स्थिति को नियंत्रण में रखने में मदद कर रहे हैं.

यूडीडी एक लोक आंदोलन है जो प्रधानमंत्री वेज्जाजीवा का इस्तीफा चाहता है और चुनावों के ज़रिए पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्र की वापसी की मांग कर रहा है. अनुमानों के मुताबिक लगभग एक लाख प्रदर्शनकारियों के यातायात और खाने पीने की व्यवस्था में क़रीब एक लाख डॉलर लगते हैं और यह पैसा थकसिन से आता है.

थकसिन 2001 से लेकर 2006 तक थाइलैंड के प्रधानमंत्री रह चुके हैं जिसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के इलज़ाम में पद से हटना पड़ा. लेकिन देश के ग़रीबों में वे काफी लोकप्रिय हैं और उनके समर्थकों का मानना है कि थाइलैंड में केवल वही बदलाव ला सकते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एम गोपालकृष्णन

संपादनः आभा मोंढे

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