जर्मन कैथोलिक चर्च के प्रमुख ने उन लोगों से माफ़ी मांगी है जो बचपन में पादरियों के शोषण का शिकार बने. पोप ने इस तरह के मामलों में जर्मन आर्कबिशप से कड़े क़दम उठाने को कहा है.
आर्कबिशप रोबर्ट त्सोलिच
जर्मन बिशप कांफ़्रेस के प्रमुख आर्कबिशप रोबर्ट त्सोलिच ने कहा है कि चर्च कैथोलिक संस्थानों में बच्चों के शोषण के बेशुमार आरोपों की जांच कराएगा. साथ ही ऐसे मामलों के पीड़ितों की काउंसलिंग होनी और भविष्य में इस तरह के शोषण को रोकने के लिए क़दम उठाए जाएंगे. त्सोलिच ने बताया कि उन्होंने पोप को बताया कि कैथोलिक संस्थानों में बच्चों के शोषण से जुड़ी 100 से भी ज़्यादा रिपोर्टें सामने आई हैं. इनमें से रेंगेंसबुर्ग क्वायर से जुड़ा मामला भी शामिल है जिसे 1964 से 1994 तक पोप के भाई ने चलाया.
त्सोलिच ने कहा कि उन्होंने पोप को बताया कि चर्च इस संकट से किस तरह निपटने की योजना बना रहा है. ख़ासकर इस तरह के मामलों पर एक प्रतिनिधि को नियुक्त किया जाएगा. जर्मनी में जन्मे पोप बेनेडिक्ट 16वें ने इस मुद्दे पर कड़े और निर्याणक क़दम उठाने के लिए "प्रोत्साहित" किया है. जर्मन आर्कबिशप ने कहा कि यह क़दम वेटिकन की तरफ़ से उठाए जाने वाले क़दमों से अलग होंगे. उन्होंने
पोप से आर्कबिशप रोबर्ट त्सोलिच की मुलाक़ात
बताया कि जर्मन चर्च अब भी इस तरह के मामलों पर जानकारी जुटा रहा है इसलिए पीड़ितों को मुआवज़ा देने की बात करना अभी जल्बाज़ी होगी.
उधर 'वी आर चर्च' नाम की संस्था ने पोप और त्सोलिच की मुलाक़ात की यह कहकर आलोचना की है कि इसमें ठोस क़दमों की बात नहीं की गई है. संस्था की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है, "दूर रोम से माफ़ी मांगने की बजाय आर्कबिशप को पीड़ितों से मिलना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए और यह कोशिश करनी चाहिए कि कैसे उनसे मेलमिलाप बढ़ाया जाए. यह भी बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पोप ने पीड़ितों के लिए सहानुभूति का एक शब्द भी नहीं कहा." बयान में आगे कहा गया है कि वेटिकन को यह बात माननी चाहिए कि "यौन हिंसा दुनिया भर में कैथोलिक चर्च की एक बड़ी समस्या है."
ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड में इस तरह के मामले उभरने के बाद इसी हफ़्ते वेटिकन ने संकट की गंभीरता पर चिंता जताई. आयरलैंड और अमेरिका में बच्चों का शोषण पहले ही चर्च की प्रतिष्ठा और उसे मिलने वाली आर्थिक मदद पर चोट कर चुका है. अमेरिकी चर्च
अमेरिका में भी चर्च की प्रतिष्ठा को नुक़सान हुआ
तो पीड़ितों को दो अरब डॉलर दे रहा है.
जर्मनी में बाल शोषण का ताज़ा विवाद पोप के ख़ासा सिर दर्द साबित हो रहा है. आम लोगों के बढ़ते ग़ुस्से के बीच जर्मन संसद के निचले सदन बुंडेस्टाग के उपाध्यक्ष वोल्फ़गांग थीरसे ने कहा है कि बाल शोषण के लिए ज़िम्मेदार लोगों की तरफ़ से पोप को पीड़ितों से माफ़ी मांगनी चाहिए. पोप के नज़दीकी सहयोगी और विएना के कार्डिनल क्रिस्टोफ़ शोएनबॉर्न ने चर्च से अपील की है कि वह कुंवारापन, पादरियों की ट्रेनिंग और सेक्स को लेकर बदली सामाजिक सोच जैसे उन मुद्दों पर चर्चा करे जिन पर अब तक बात ही नहीं हुई है.
वहीं पोप ने शुक्रवार को कहा है, "कुंवारापन पूर्ण श्रद्धा की निशानी है. इसका मतलब है कि कोई ईश्वर और दूसरों को समर्पित है." इस तरह पोप ने साफ़ कर दिया है कि वेटिकन के नज़रिए में कोई बदलाव नहीं आया है. 2 करोड़ 60 लाख जर्मन कैथोलिकों के नेता आर्कबिशप त्सोलिच का कहना है कि विशेषज्ञों को कुंवारेपन और बाल शोषण या फिर अध्यापकों द्वारा बच्चों से की जाने वाली अश्लील हरकतों के बीच कोई संबंध नहीं मिला है, लेकिन चर्च को इन कारणों पर तो खुलकर चर्चा करनी ही होगी कि यह क्यों अहम है.
रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार
संपादनः ओ सिंह