बर्लिन में चल रहे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेले आईटीबी में 187 देशों के 11 हज़ार प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं. आर्थिक संकट और भारी विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा ग्रीस इस मेले में शामिल हुआ है. मेले में बुटीक होटल के चलन की धूम.
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेले में ताइवान
पर्यटकों के पसंदीदा देश स्पेन और इटली भी मौजूद हैं. इस साल आईटीबी का मुख्य साझीदार देश तुर्की हैं.
2010 के मेले में एक ख़ास ट्रेंड है बुटीक होटल्स का. ये होटल सस्ते तो नहीं हैं लेकिन हर व्यक्ति के लिए ख़ास तौर पर सजाए जाते हैं. इंग्लैंड और अमेरिका से शुरू हुआ यह चलन अब ऐसे देशों में भी पहुंच गया है जहां होटल सिर्फ़ सोने के लिए बनाए गए कमरों के तौर पर इस्तेमाल किए जाते थे. यानी उनमें कोई आत्मा नहीं होती थी. मसलन इस बार आईटीबी का मुख्य अतिथि देश तुर्की है. वहां भी आजकल इस तरह के बुटीक होटलों का फैशन है.
तुर्की के अन्ताल्या शहर में नेरमिन सुएमर एक बुटीक होटल तुवाना चलाती हैं. वह कहती हैं कि लोग हमारे यहां छुट्टियां मनाने आते हैं. वे पहले ही दुनिया देख चुके होते हैं और इसलिए वे चाहते हैं कि होटल सामान्य पर्यटन होटलों से अलग हो. तुवाना होटल के डीलक्स कमरे एक रात के लिए आपको कम से कम ढाई सौ यूरो यानी 15 हज़ार रुपये चुकाने होंगे.
वहीं जर्मनी में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली डॉ. डोमीनिक रोसमान कहती हैं कि हर यात्रा में पर्यावरण की बेहतरी के लिए छोटे छोटे क़दम उठाए जा सकते हैं. "मैं ध्यान रख सकती हूं कि ज़्यादा कचरा न फैलाऊं और अपने कचरे को इधर उधर न फेंकू. साथ ही, जैसा कि यूरोप में लोगों की ज़्यादा पानी इस्तेमाल करने की आदत होती है, उसे कम करुं. अपने पर्यावरण के बारे में यह छोटी छोटी बातें हम ध्यान रख सकते हैं."
बर्लिन में छब्बीस बड़े बड़े हॉल्स में फैले इस पर्यटन मेले को शनिवार के दिन आम लोगों के लिए खोला जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि कम से कम सत्रह हज़ार लोग इस मेले में आएंगे.
उद्धाटन के दिन जर्मन यात्रा परिषद के प्रमुख क्लाउस लापेले ने उम्मीद जताई कि इस साल पर्यटन उद्योग की स्थिति बेहतर होगी. लापेले का कहना था कि बुरा साल बीत गया है. 2010 से लगता है कि हालात बेहत हुए हैं और आने वाला साल निश्चित ही और अच्छा होगा.
केन्या, उज़्बेकिस्तान, भारत और श्रीलंका भी इस पर्यटन मेले में हिस्सा ले रहे हैं. हाल ही के दिनों में तुर्की ब्रिटेन, जर्मनी और कुछ पश्चिमी देशोँ के लोगों के लिए पसंदीदा देश बन गया है. पिछले साल जर्मनी से तुर्की जाने वाले यात्रियों की संख्या में दस फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे
संपादनः ए कुमार