केंद्र सरकार ने पारदर्शी गैस सिलेंडर के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. इसके तहत फ़ाइबर ग्लास के बने महंगे सिलेंडर बाज़ार में आ सकेंगे. ग्राहक सिलेंडर में कितनी गैस है, इसका पता बाहर से देखकर ही लगा सकेंगे.
योजना के मुताबिक़ आने वाले दिनों में भारत में आर पार देखे जा सकने वाले गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल होने लगेगा. फ़ाइबर ग्लास के सिलेंडरों में छेड़छाड़ की गुंजाइश भी कम होगी. फ़ाइबर ग्लास उच्च श्रेणी के कांच के रेशों से बनता है. यह बेहद हल्का, मजबूत और उच्च ताप सहन कर सकता है. कई परीक्षणों में पता चला है कि स्टैंडर्ड क्वालिटी का फ़ाइबर ग्लास 1,500 डिग्री के तापमान को आसानी से सहन कर सकता है. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि भारत में आने वाले गैस सिलेंडर किस क्वालिटी के होंगे.
गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा, ''सरकार ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को घरेलू गैस सप्लाई के लिए पारदर्शी फ़ाइबर ग्लास के सिलेंडर के इस्तेमाल करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.''
सरकार ने यह भी साफ़ किया है कि फ़ाइबर ग्लास के बेहद हल्के और पारदर्शी सिलेंडरों पर किसी तरह रियायत नहीं दी जाएगी. यानी सिलेंडर की क़ीमत ग्राहक को ही चुकानी होगी. कहा जा रहा है कि नए सिलेंडर की क़ीमत काफ़ी ज़्यादा होगी. लेकिन कनेक्शन की यह क़ीमत मौजूदा प्रणाली की तरह ही ग्राहक को एक बार चुकानी होगी. बाद में सिलेंडर बदलने पर सिर्फ़ गैस की क़ीमत देनी होगी फिर भी यह आम सिलेंडर के मुक़ाबले महंगा होने की बात कही जा रही है. इस बीच सरकार का कहना है कि स्टील के मौजूदा गैस सिलेंडर भी बाज़ार में बने रहेंगे.
शुरूआत में इन सिलेंडरों को प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की योजना है. पहले चरण में बैंगलोर, चेन्नई, मुंबई, और पुणे में इन सिलेंडरों को उतारा जाएगा. सिलेंडर की क़ीमत कम रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेंडर जारी किए गए हैं.
रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह
संपादन: एस गौड़