भारतीय मूल के अमेरिकी प्रोफ़ेसर मनोरंजन 'मानो' मिश्रा को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नेवाडा, रेनो ने सम्मानित किया है. नवीनीकृत ऊर्जा में मिश्रा के शोध के लिए उन्हें 'रीजेंट्स रिसर्चर अवार्ड' दिया गया है.
नैनोटेकनॉलजी हम सब की ज़िंदगी का हिस्सा बन रहा है
उड़ीसा के रहने वाले मिश्रा ने कॉफ़ी और मुर्गियों के पंखों से ईंधन निकालने के तरीक़े विकसित किए हैं. इस प्रयोग ने मीडिया को भी आकर्षित किया है. मिश्रा ने पानी से ज़हरीली आर्सेनिक धातु को निकालने के लिए भी एक प्रक्रिया विकसित की है जिसके तीन पेटेंट पंजीकृत हो चुके हैं.
सोने की खदानों में पानी से सायनाइड को निकालने में भी मिश्रा के प्रयोग काम आए हैं. नेवाडा और विश्व भर में इन प्रक्रियाओं का उपयोग हो रहा है. उन्होंने सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन भंडारण और नकली हाथ पैर बनाने के लिए नैनोटेक्नॉलजी और सेंसर टेक्नॉलजी पर भी काम किया है.
मिश्रा अमेरिका के नेवाडा विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं. उनके द्वारा विकसित की गई प्रक्रियाओं के लिए उनके पास 10 पेटंट हैं और 12 अन्य प्रक्रियाओं का पंजीकरण जारी है. मिश्रा को उनके प्रयोगों के लिए ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि दी गई है और कई महत्त्वपूर्ण विज्ञान पत्रिकाओं ने उन्हें उनके योगदान के लिए सराहा है.
रिपोर्टः पीटीआई/एम गोपालकृष्णन
संपादनः एस गौड़