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ख़ास ख़बर

लोकसभा में आरक्षण बिल लाने की जल्दी नहीं!

राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल के पारित होने पर चैन की सांस ले रही केंद्र सरकार बिल को लोकसभा में जल्दबाज़ी में नहीं लाना चाहती. कांग्रेस ने कहा है कि बिल के मुद्दे पर सौहार्दपूर्ण माहौल तैयार करने की कोशिश होगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पेश कब पेश किया जाएगा इस पर कयास लगने शुरू हो गए हैं. माना जा रहा है कि सरकार बजट के पास होने से पहले किसी तरह का ख़तरा मोल नहीं लेना चाहती. वैसे भी उसे समर्थन दे रही दो पार्टियां उसका साथ छोड़ चुकी हैं. 16 मार्च को बजट सत्र का पहला चरण ख़त्म हो रहा है और दूसरा चरण 12 अप्रैल से शुरू होगा.

क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने इस बात को ख़ारिज किया कि यूपीए सरकार को किसी तरह का ख़तरा है. मोइली के मुताबिक़ सरकार के पास बहुमत है और बिल को पेश करने में जानबूझकर देरी करने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है.

संसदीय कार्य मंत्री पीके बंसल ने अभी कोई संकेत नहीं दिए हैं कि बिल को 16 मार्च से पहले ही पेश कर दिया जाएगा. बंसल ने कहा, "हम हर एक के साथ सहमति बना कर चलना चाहते हैं. हम इस मुद्दे पर सौहार्दपूर्ण माहौल बनाने की कोशिश करेंगे. राज्यसभा जैसी घटना को फिर न होने देने के प्रयास किए जाएंगे."

ममता बैनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस राज्यसभा में बिल पर वोटिंग का बायकॉट किया था. बुधवार को बैनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की और बिल पर अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया है. रिपोर्टों के मुताबिक़ सोनिया गांधी ने ममता बैनर्जी को भरोसा दिलाया है कि लोकसभा में बिल को पेश किए जाने से पहले सभी पार्टियों के साथ ज़रूरी विचार विमर्श किया जाएगा.

उधर बिल का उसके मौजूदा स्वरूप में पुरज़ोर विरोध कर रहे समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद यादव ने औपचारिक रूप से समर्थन वापस लेने की धमकी पर बुधवार को अमल नहीं किया. लालू और मुलायम ने बताया कि फ़िलहाल वे सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनके पास ज़रूरी सांसद ही नहीं हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एम गोपालकृष्णन

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