1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

छप्पन भोग का सेवन बनी बीमारियों की वजह

प्राचीन मिस्र में राजा रानियों के शाही ठाठ बाट के क़िस्से मशहूर हैं. ईश्वर को चढ़ावे के लिए वे बहुत तला भुना और भारी भरकम कैलोरी वाला भोजन करते और जम कर मदिरा पीते. लेकिन उनकी यही आदत उनकी कम उम्र की वजह भी बनी.

नाना प्रकार के व्यंजन

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि जिस तरह का भोजन मिस्र के राजघराने के लोग करते थे उन्हें वर्तमान स्टैंडर्ड के हिसाब से 'जंक फ़ूड' ही कहा जाएगा. मिस्र में ईश्वर को छप्पन भोग का चढ़ावा दिया जाता लेकिन राजा रानी और पुरोहित भी उसके स्वाद से ख़ुद को दूर नहीं रख पाते थे.

ममी का परीक्षण

उनके भोजन में नियमित रूप से गोमांस, चिड़िया का मांस, ब्रेड, सब्ज़ियां, फल, केक, वाइन, बीयर शामिल होता. एक दिन में तीन बार यह भोजन सामग्री ईश्वर को चढ़ाई जाती. बचे हुए भोजन को कई बार पुरोहित अपने घर ले जाते और फिर उनका पूरा परिवार स्वादिष्ट भोजन से अपनी भूख को शांत करता.

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कई पुरोहितों की ममी का परीक्षण किया और पाया कि उनकी धमनियां क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं और उन्हें दिल की बीमारी थी. मेडिकल मैगज़ीन लैनसेट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ वह नमक का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा करते थे और जितनी मदिरा का सेवन करते थे उसे देखकर पीने से प्यार करने वाले लोग भी शर्मा सकते हैं.

प्रोफ़ेसर रोसेली डेविड का कहना है कि यह स्टडी बताती है कि अगर आप ईश्वर की तरह रहना चाहते हैं तो ऐसी जीवनशैली की क़ीमत आपको अपनी सेहत से चुकानी होगी.

पुरोहितों की ममी के परीक्षण के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी धमनियों की दीवारों पर काफ़ी मात्रा में चिकनाई जमा थी जो एथेरोसेलेरोसिस का स्पष्ट संकेत है. इससे साफ़ है कि एथेरोसेलेरोसिस पुराने समय में भी लोगों को परेशान करता रहा है और इसकी वजह खान पान से जुड़ी है.

अपनी रिसर्च के लिए मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी की टीम ने 22 ममी का परीक्षण किया. ख़ास तौर पर उन ममी को चुना गया था जिनका प्राचीन मिस्र में सामाजिक स्तर ऊंचा था. 16 ममी की धमनियों और दिल को परीक्षण के लिए उपयुक्त समझा गया और 9 ममी ऐसी थी जिनकी धमनियों में चिकनाई के एकत्र होने के संकेत मिले.

इस शोध से जुड़े लोगों का कहना है कि यह समझने में मदद मिल सकती है कि प्राचीन मिस्र के उच्च वर्ग की औसत आयु महज 40 से 50 साल ही क्यों थी. जबकि आम तौर पर सादा जीवन व्यतीत करने वाले और कम चिकनाई युक्त भोजन करने वाला एक आम मिस्रवासी अपने राजा रानियों या फिर पुरोहित से लंबी उम्र क्यों जिया.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ए कुमार

अन्य खबरें