भारत के गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने हिंसा छोड़ने की शर्त पर माओवादियों से बात करने की पेशकश दुहराई है और कहा है कि सरकार को माओवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों में ऑपरेशन करने पर बाध्य होना पड़ा है.
केंद्रीय गृह मंत्री माओवादी हिंसा पर प्रभावित राज्यों पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड और बिहार के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए कोलकाता में थे. बैठक में पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के मुख्यमंत्रियों के अलावा झारखंड के दो उप मुख्यमंत्रियों और सभी राज्यों को उच्चाधिकारियों ने भाग लिया.
बैठक के बाद चिदंबरम ने कहा कि सरकार नक्सलियों से अधिक करने को नहीं कह रही. अगर वे हिंसा रोकने का आह्वान करते हैं तो सरकार उनके साथ किसी भी मुद्दे पर बात करने को तैयार है.
गृह मंत्री ने नक्सलियों से निपटने के लिए की जा रही कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा, "प्रगति धीमी लेकिन ठोस है. पिछले महीनों में कई अहम नेताओं को पकड़ा गया है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल नक्सलियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास करेंगे."
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस बात का ध्यान रखेगी कि नक्सल विरोधी कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों को नुक़सान न पहुंचे. साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया के एक हिस्से व ग़ैर सरकारी संगठनों की आशंका के विपरीत कत्लेआम नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार के अभियानों का उद्देश्य किसी की हत्या नहीं है.
उन्होंने कहा, "ये हमारे अपने लोग हैं, हमें उनकी चिंता है, हमें उनकी जान की परवाह है." गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्यों में अतिरिक्त बल तैनात किए जाएंगे और बहुत जल्द कानून का शासन लागू किया जाएगा.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया. प्रांत के गृह सचिव बैठक में मौजूद थे. चिदंबरम ने कहा कि सभी मुख्यमंत्री नक्सलियों के ख़िलाफ़ अपनाई जा रही रणनीति से सहमत हैं. नीतीश कुमार ने अपनी अनुपस्थिति के बारे में कहा, "हर समय राज्य से बाहर रहना संभव नहीं है."
रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा
संपादन: उज्ज्वल भट्टाचार्य