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दुनिया

9/11 मामले पर जर्मनी की हिदायत

जर्मनी चाहता है कि अमेरिका 9/11 कांड के आरोपियों को उसके दिए सबूतों के आधार पर मृत्युदंड न दे. जर्मनी की एक कानूनी टीम इस सिलसिले में न्यूयॉर्क भी जा रही है. जर्मनी के सबूतों के बिना एक आरोपी को दोषी ठहराना मुश्किल.

वर्ल्ड सेंटर पर हमला

जर्मनी की एक पत्रिका डेर श्पीगल की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी के कानूनी पर्यवेक्षकों की टीम 11 सितंबर हमले के आरोपियों के ख़िलाफ़ चलने वाली सुनवाई देखना चाहती है. जर्मनी इस बात की तसदीक़ करना चाहता है कि अमेरिका जर्मन सबूतों के आधार पर आरोपियों को मृत्युदंड न दे. अमेरिकी न्याय विभाग ने हफ़्ते भर पहले ही ख़ालिद शेख मोहम्मद और उसके चार साथियों की सुनवाई शुरु करने का एलान किया था.

जर्मनी में मौत की सज़ा नहीं है, इसीलिए जर्मनी ने अमेरिका को सबूत भी इसी शर्त पर मुहैया कराए थे कि उनका इस्तेमाल मृत्युदंड के लिए नहीं होगा. इन सबूतों को बेहद अहम माना जाता है क्योंकि अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 के दिन हमला करने और उसकी योजना बनाने वाले अल क़ायदा के ज़्यादातर सदस्य हमले से पहले जर्मनी के शहर हैम्बर्ग में थे. आत्मघाती हमले के दौरान विमान पर सवार आरोपियों ने विमान उड़ाना भी जर्मनी के बॉन शहर में सीखा था.

लेकिन इन सबके बावजूद शनिवार को जर्मनी के न्याय मंत्री ज़ाबीने लॉयटहॉएसार स्खालेबेअगर ने कहा, ''इस मामले में हम बारीक़ी से देखेंगे कि क्या हमें दिए गए आश्वासन का पालन हो रहा है या नहीं.'' हालांकि अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि किस तरह जर्मनी के दिए गए सबूतों को जुटाए गए अन्य सबूतों से अलग रखा जाएगा. एक आरोपी के वकील रमजी बिनालसाहिब का कहना है कि, ''यह मुमकिन है कि जर्मनी के सबूतों के बिना उनके मुवक्क़िल को दोषी ठहराया जाना मुश्किल है.''

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: एस जोशी

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