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विज्ञान

कृष्णा भी कोमा से बाहर

ऑस्ट्रेलिया में अभूतपूर्व ऑप्रेशन के बाद सिर से जुड़वां दो बहनें अलग होने के बाद सकुशल और सुरक्षित हैं. दूसरी बच्ची ने भी आंखें खोल दी हैं और डॉक्टरों ने इस पर बड़ी राहत और संतोष जताया है.

लंबी नीद से जागी कृष्णा

तृष्णा से जुड़ी कृष्णा को अलग करने का ऑप्रेशन जटिल था. और उसमें कुछ कॉम्प्लीकेशन्स आ गए थे. तृष्णा कुछ दिन पहले ही कोमा से जग गई थी. और अब कृष्णा भी नीम बेहोशी से उठ गई है. डॉक्टरों का कहना है कि दोनों बहनें स्वस्थ हैं लेकिन अभी पूरी निगरानी में हैं.

एक दुनिया में दो बहनें

अगले महीने दोनों बहनें तीन साल की हो जाएंगीं. 2007 में दोनों को बांग्लादेश से ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न शहर लाया गया था. सिर से जुड़ी बहनों के ब्रेन टिश्यू यानी मस्तिष्क ऊतक और रक्त शिराएं यानी ख़ून की नसें भी एक थीं.

डॉक्टरों का कहना है कि दोनों बच्चियों के पूरी तरह से ठीक होने में अभी लंबा वक़्त लगेगा. और इस दौरान लगातार टेस्ट किए जाते रहेंगे. मेलबॉर्न के रॉयल चिल्ड्रन अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है. दो साल के सघन परीक्षणों और अध्ययनों के बाद पिछले दिनों जुड़वा बहनों का ऑप्रेशन किया गया था. इस जटिल और जोखिम भरे काम में सिर अलग करने में ही डॉक्टरों को 25 घंटे लग गए थे.

आशंका थी कि इस प्रक्रिया में दोनों बहनों में से एक को दिमागी नुकसान हो सकता है लेकिन विशेषज्ञ सर्जनों की मेहनत रंग लाई है और दोनों बहनें सुरक्षित हैं. ऑप्रेशन के कुछ ही घंटों बाद तृष्णा जग गई थी और उसे अब आईसीयू से भी हटा दिया गया है. वो स्वस्थ और सामान्य बताई गई है.

ये है तृष्णा

लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि तृष्णा की बहन इतनी ख़ुशनसीब नहीं. जग तो वो गई है और ख़तरे से बाहर कही जा सकती है लेकिन उसे पूरी तरह से सामान्य हालत में आने में समय लगेगा. क्योंकि उसके शरीर और ख़ून की आवाजाही में भी कुछ बदलाव करने पड़े हैं.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक अनाथालय से इन बच्चियों को ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया था. और ये काम मेलबॉर्न की एक सामाजिक संस्था चिल्ड्रन फर्स्ट फाउंडेशन ने किया था. दोनों बहनों के क़ामयाब ऑप्रेशन और उनके स्वस्थ होने की ख़बर पर ढाका के पास एक इलाके में रहने वाली उनकी मां ने भावुकता भरी ख़ुशी जताई है. उसकी कामना है कि उसकी बेटिंयां ऑस्ट्रेलिया में ही पले बढ़ें क्योंकि वो ग़रीबी की वजह से उनका ख़्याल नहीं रख पाएगी.

रिपोर्ट- एजेंसियां/एस जोशी

संपादन- ओ सिंह

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