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ताना बाना

''वीज़ा पर विदेशियों का मौलिक अधिकार नहीं''

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि विदेशी नागरिक को भारत में रहने के लिए वीज़ा से जुड़ा कोई मौलिक अधिकार नहीं है. इस्राएल के एक व्यापारी हिलेल शपीरा की एक अर्ज़ी को खारिज करते हुए कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया

केंद्र सरकार ने इससे पहले हिलेल को वापस इस्राएल भेजने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने कहा कि कोई भी ऐसा विदेशी व्यक्ति जिसके वीज़ा के लिए आवेदन या उसको बढ़ाने का आवेदन, ख़ारिज़ कर दिया जाता है तो उसके मामले को नहीं सुना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि एक बार हिलेल शपीरा का बिजनेस वीज़ा बढ़ाने का आवेजन रद्द हो गया तो हो गया. इसका अर्थ ये है कि उन्हें देश छोड़ना होगा और उनका कोई इस बारे में अधिकार भी नहीं बनता.

शपीपा 1996 में कारोबारी वीज़ा पर भारत आए थे. पुणे में उन्होंने हेल्थ फूड की एक कंपनी खोली और समय समय पर उनका वीज़ा बढ़ता रहा. जून 2006 में उन्होंने वीज़ा को बढ़ाने का आवेदन किया. उन्हें इस साल अप्रैल में पता चला कि उनका वीज़ा खारिज कर दिया गया है. और उन्हें देश छोड़ने को कहा गया है. पासपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक पिछले तीन साल में शपीरा की आय का हिसाब मिला है वो हर साल एक लाख रुपए कमा रहे थे. यानी हर महीने साढ़े आठ हज़ार रुपये.

रिपोर्ट- एजेंसियां/एस जोशी

संपादन- ओ सिंह

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