भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने अहमदाबाद में एक नीरस और बोझिल टेस्ट मैच के बाद कहा कि इस तरह के ग्राउंड टेस्ट मैच को मार देंगे. पूरे पांच दिन सिर्फ़ बल्लेबाज़ों को मदद मिलती रही और दोनों टीमों के छह बैट्समैन ने शतक लगाए.
अहमदाबाद ग्राउंड से गुस्सा
टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच अहमदाबाद में पहला टेस्ट ड्रॉ होने के बाद भज्जी ने कहा, "अहमदाबाद ग्राउंड में बल्लेबाज़ों को फ्री टिकट मिल गया और किसी तरह की प्रतियोगिता नहीं बची. ऐसे ग्राउंड टेस्ट मैचों की हत्या कर देंगे."
इस ग्राउंड की चौतरफ़ा निंदा हुई है और दोनों ही कप्तानों ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि चौथे और पांचवें दिन गेंदबाज़ों को विकेट से कुछ मदद मिल सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक बोझिल और उबाऊ मैच का ड्रॉ होना दूसरे दिन ही लगभग तय हो गया था. पांच दिन के खेल में सिर्फ़ 21 विकेट गिरे, जिनमें 14 भारत के रहे. श्रीलंका के सिर्फ़ सात.
सचिन ने भी लगाया सैकड़ा
हरभजन सिंह का कहना है कि ऐसे विकेट गेंदबाज़ों के लिए जानलेवा साबित होते हैं. दिन भर पसीना बहाने के बाद भी उनके हाथ कुछ नहीं लगता. इससे गेंदबाज़ों के करियर पर असर पड़ सकता है. शोएब अख़्तर हों या डेल स्टर्न, ऐंड्रयू फ्लिंटॉफ़ हों या मुथैया मुरलीधरन, भारतीय विकेट पर हर कोई नाकाम साबित होता दिखता है.
अहमदाबाद टेस्ट में हरभजन सिंह को दो विकेट हासिल करने के लिए लगभग 49 ओवर गेंदें फेंकनी पड़ी और 189 रन ख़र्च करने पड़े. टीम इंडिया के दूसरे स्पिनर अमित मिश्रा की हालत तो इससे भी ख़राब रही. उन्होंने 58 ओवर फेंके और 200 से ज़्यादा रन दिए. उन्हें सिर्फ़ एक विकेट मिला. भारत की तरफ़ से इशांत शर्मा और ज़हीर ख़ान ने भी 100 रनों से ज़्यादा ख़र्च किए.
भारत के ग्राउंड पिछले कुछ दिनों से सवालों के घेरे में रहे हैं. यहां खेले गए आख़िरी 12 टेस्ट मैचों में से सात ड्रॉ रहे हैं. इस दौरान एक तिहरा शतक, छह दोहरे शतक और 32 शतक लगे हैं. एक बार किसी टीम ने पारी में 700 का आंकड़ा पार किया है. तीन बार पारी में 600 का, तीन बार 500 का और कई बार 400 रन से ज़्यादा एक पारी में बने हैं. इन आंकड़ों से लगता है कि भारत में विकेट पूरी तरह बल्लेबाज़ों के लिए तैयार किए जाते रहे हैं.
हरभजन सिंह का कहना है कि सिर्फ़ उनकी बात नहीं है, दुनिया में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ मुरलीधरन भी गेंदबाज़ी में संघर्ष करते रहे. जब पांचवें दिन आम तौर पर विकेट टूटता है और स्पिनरों को मदद मिलती है, उस दिन भी मुरली की गेंदें कोई भी बल्लेबाज़ आसानी से खेल सकता था.
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पहले ही कह चुके हैं कि वह अहमदाबाद के मोटेरा जैसे ग्राउंडों पर दोबारा नहीं खेलना चाहेंगे. भारत और श्रीलंका के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज़ चल रही है और दूसरा टेस्ट 24 नवंबर से कानपुर में खेला जाएगा.
रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल