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ताना बाना

अमेरिकी दौरे पर मनमोहन सिंह

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पहले राजकीय मेहमान के रूप में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोह सिंह वॉशिंगटन पहुंच रहे हैं. मंगलवार को बराक ओबामा के साथ बैठक. दोनों पक्षों की कोशिश आपसी रिश्तों को नए आयाम पर ले जाने की है.

अमेरिका एक उभरती शक्ति के रूप में भारत के तेज़ी से बढ़ते महत्व को पहचानता है, इसका पता इसी सप्ताह अमेरिका के, राजनीतिक मामलों के अवर विदेशमंत्री बिल बर्न्स के बयान से चलता है. बर्न्स ने कहा कि 21वीं शताब्दी में भारत-अमेरिका संबंधों की तुलना में शायद ही कोई और संबंध अधिक महत्वपूर्ण साबित हों. उन्होंने कहा, "भारत को इस नई सदी में लगभग सभी प्रमुख चुनौतियों के सिलसिले में अधिकाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी है. वैश्विक आर्थिक अव्यवस्था से लेकर ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और हिंसात्मक अतिवाद तक की समस्याओं पर."

मनमोहन सिंह ओबामा सरकार के पहले राजकीय मेहमान के रूप में अपनी तीन दिन की वॉशिंगटन यात्रा रविवार को शुरू करेंगे. इस दौरान वो और ओबामा कार्बन उत्सर्जन से लेकर अरबों डॉलर के रक्षा अनुबंधों और परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने में तेज़ी लाने तक के विषयों पर बातचीत

करेंगे. भारतीय पीएम की यात्रा की सफलता शायद इस पैमाने पर आंकी जाएगी कि वॉशिंगटन नई दिल्ली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में मौजूद संदेहों का किस हद तक निराकरण कर पाता है. ऐसे वक्त में जब चीन और पाकिस्तान, दोनों को अमरीकी विदेशनीति की प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है.

संकेत यही हैं कि अमेरिका भारतीय हितों को छेड़ना नहीं चाहता है. इसी हफ्ते अमेरिकी प्रतिनिधि सदन ने भारत-अमेरिका संबंधों की परिपक्वता की सराहना में एक प्रस्ताव पास किया है. प्रतिनिधि सभासद गैरी ऐकरमैन ने दोनों देशों के साझे मूल्यों का ज़िक्र किया और भारत को एक अंतरराष्ट्रीय शक्ति बताया, उनका कहना है कि, "भारत के साथ हमारी साझेदारी इस आधार पर निर्मित है कि उसका एशिया में एक बड़ी ताक़त के रूप में और एक वैश्विक शक्ति के रूप में उदय मूल महत्व के अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाता है, लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन से लेकर एशिया के सभी भागों में स्थिरता और सुरक्षा में सुधार लाने तक."

ठोस कामों से इतर यह यात्रा अपनी धूमधाम के लिए भी याद रखी जाएगी. इसी साल जनवरी में अमेरिका की गद्दी संभालने वाले ओबामा अपने मेहमान के सम्मान में अपनी सरकार का पहला राजकीय भोज आयोजित कर रहे हैं. मेहमानों की गिनती इतनी है कि उन्हें समाने के लिए व्हाइट हाउस के लॉन में एक विशाल टैंट लगाया जा रहा है. ये चार सौ ख़ुशकिस्मत मेहमान कौन होंगे, इसे लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. सुनने में आ रहा है कि कई बड़े नाम भी उनमें शामिल नहीं होंगे. मेहमानों की सूची में कम से कम फ़िलहाल एक नाम का शामिल न होना सुर्ख़ियों का विषय बन रहा है. यह नाम है, पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन का.

रिपोर्ट: गुलशन मधुर, वॉशिंगटन

संपादन: ओ सिंह

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