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दुनिया

गन्ना मूल्य पर बवाल ख़त्म पर आगे...

भारत में संसद से सड़क तक गन्ने के समर्थन मूल्य पर हुए भारी हंगामे के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा व्यवस्था में संशोधन करने का फ़ैसला किया है. इस तरह इस मामले पर जारी गतिरोध के ख़त्म होने की संभावना है.

किसानों को राहत कितनी दूरगामी

नई व्यवस्था के तहत वर्तमान अध्यादेश में केंद्र सरकार के घोषित गन्ना समर्थन मूल्य और राज्य सरकार के घोषित मूल्य का अंतर गन्ना मिल मालिकों को ही किसानों को देना होगा. यानी राज्य सरकार को किसानों को दोनों समर्थन मूल्यों का अंतर देने की ज़रूरत नहीं होगी.

विवाद इसी बारे में था कि केंद्र अगर कोई कीमत तय कर देता है और फिर राज्य सरकार गन्ने का अपनी तरफ़ से समर्थन मूल्य तय करती है और ऐसी स्थिति में उसकी तय कीमत केंद्र की तय की कीमत से ज़्यादा होगी तो दोनों मूल्यों का अंतर देने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की होती है.

बीजेपी नेता सुषमा स्वराज और राष्ट्रीय लोक दल के नेता अजीत सिंह ने सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया है.

संसद के अदंर और बाहर हुए हंगामे के बाद ये फ़ैसला सर्वदलीय बैठक के बाद किया गया. संसद का शीतकालीन सत्र इस वजह से पहले दो दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया था. केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अगुवाई में कैबिनटे की एक समिति की भी बैठक हुई जिसके बाद गन्ना मूल्य पर ए गतिरोध ख़त्म हो पाया.

मौजूदा अध्यादेश में संशोधन के लिए एक विधेयक लाया जाएगा जिसके तहत ये प्रावधान होगा कि दोनों समर्थन मूल्यों का अंतर किसानों को देने की ज़िम्मेदारी गन्ना मिल मालिकों की होगी. प्रणब मुखर्जी ने दावा किया कि इससे किसानों को अपनी फ़सल का न्यायोचित दाम मिल सकेगा.

केंद्र के फ़ैसले के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के राष्ट्रव्यापी समर्थन मूल्य तय करने के फैसले से राज्य में गन्ना उत्पादक प्रभावित नहीं होंगे. उनके मुताबिक राज्य सरकार पहले ही किसानों के लिए अब तक के सर्वोच्च मूल्य की घोषणा कर चुकी है.
हरियाणा में गन्ने का समर्थन मूल्य 185 रुपये प्रति कुंटल है. सरकार ने इसके अलावा सहकारी चीनी मिलों को गन्ना बेचने वाले किसानों को 25 रुपये प्रति कुंटल बोनस देना का भी एलान किया है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए राज्य सरकार ने 210 रुपये प्रति कुंटल के दाम की घोषणा कर दी है.

राजनीतिक गलियारों से इतर केंद्र के फ़ैसले पर अब तक चीनी मिल उद्योग की प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह बात राज्य और केंद्र सरकार से छिपी नहीं है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में कई चीनी मिलों की हालत ख़स्ता है. ऐसे में गन्ने की क़ीमत का भार सिर्फ़ मिलों पर पड़ने से आम ग्राहकों के मुंह की मिठास फीकी पड़ सकती है. यानी चीनी महंगी हो सकती है.
रिपोर्ट-एजेंसियां/एस जोशी

संपादन-ओ सिंह

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