जब से पाकिस्तानी सेना ने अल क़ायदा और तालिबान सड़ाकों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया है, देश भर में तालिबान के आत्मघाती हमलों में तेज़ी आई है. यहां तक कि आईएसआई को भी बख्शा नहीं गया है.
आईएसआई के दफ़्तर पर हमला
पिछले सप्ताहों में लगभग हर रोज़ कहीं न कहीं हमले होते रहे हैं. अब इस्लामी कट्टरपंथी सुरक्षाबलों को भी निशाना बना रहे हैं. ऐसे ही एक हमले में पेशावर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की इमारत मलबा बन गई है. एक आत्मघाती हमलावर ने सुबह 200 किलोग्राम विस्फ़ोटक से लदी एक गाड़ी उसके गेट से टकरा दी. कम से कम 19 लोग मारे गए, सौ से अधिक घायल हो गए. बर्लिन त्साइटुंग ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा है
13 नवंबर का हमला यह साफ़ करता है कि पाकिस्तान में दशकों से चली आ रही साझेदारी टूट गई है, जो जनरलों और तालिबान के बीच थी. 80 के दशक से सुरक्षा बल भारत नियंत्रित कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान में अपने लक्ष्यों के लिए इन गुटों का इस्तेमाल कर रहे थे, जो अब देश भर में हमला कर रहे हैं. हालांकि सेना अब तक अफ़ग़ान छापामारों के ख़िलाफ़ कठोर रुख नहीं दिखा रही है, लेकिन पाकिस्तान में सक्रिय गुट लगातार दबाव में आ रहे हैं. सेना का मंत्र है, जो ठीक से पेश नहीं आएगा, मारा जाएगा.
क्लिंटन और नवाज़ शरीफ़
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस्लामाबाद के दौरे पर कहा था, उन्हें यह मानने में मुश्किल हो रही है कि सरकार के सदस्य अल क़ायदा के आतंकवादियों के छुपने की जगहों को नहीं जानते. जर्मन समाचार पत्रिका डेअ श्पीगेल ने क्लिंटन से इंटरव्यू में पूछा कि उनके कहने का क्या मतलब था?
क्लिंटन: हम बहुत चिंतित हैं कि अल क़ायदा को पाकिस्तान में छुपने की जगह मिल गई है. आतंकवादी अभी भी पाकिस्तानी तालिबान के निकट संपर्क में हैं और इस देश को ख़तरे में डाल रहे हैं. हाल से ही पाकिस्तान की असैनिक सरकार इस तथ्य को ख़तरा मान रही है और उसके ख़िलाफ़ कुछ कर रही है. पाकिस्तान के दौरे पर वह इस पर ज़ोर देना चाहती थी कि अल क़ायदा नेता को पकड़ने या मारने को अमेरिका कितनी प्राथमिकता देता है. इस लक्ष्य को पाने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान से अधिक मदद की उम्मीद है.
पाकिस्तान की विश्वस्तरीय स्क्वाश खिलाड़ी मारिया तूरपाकाय को बचपन में खेलने के लिए लड़कों की पोशाक पहननी पड़ती थी. उसका जीवन पाकिस्तान में महिलाओं के दमन के ख़िलाफ़ कठिन संघर्ष की कहानी है. दैनिक डी वेल्ट ने मारिया के हवाले से लिखा है
मैंने जानबूझकर इस तरह की ज़िंदगी का फ़ैसला लिया, मारिया कहती है. विकल्प था कि मैं उसी तरह जीती जैसे वाना और दूसरे गांवों में औरते जीती हैं, बिना किसी अधिकार और बिना उम्मीद के.
संकलन: अना लेमन/महेश झा
संपादन: अशोक कुमार