हाथ मिलाना जर्मन संस्कृति का एक अहम हिस्सा है. जब आप किसी से पहली बार मिले तो ये ज़रूरी ही है कि आप हाथ मिलाएं. आगे भी अगर मुलाकात हो तो हाथ ज़रूर मिलाएं.
काम के सिलसिले में मुलाकात हो या सामान्य मुलाकात. ये उम्मीद की जाती है कि आते समय और वहां से जाते समय हर कोई एक दूसरे से हाथ मिलाएगा.
किसिंग, चुंबन- सामान्य यारी दोस्ती में कई बार दोस्त हाथ मिलाने के बजाए अपने दोनों गाल बारी बारी मिलाते हुए हवा में किस करते है. हालांकि गालों में किस करने का रिवाज़ जर्मनी में उतना गहरा नहीं है यूरोप के और देशों में है. लेकिन जिन देशों में इस तरह की संस्कृति नहीं है वहां के लोगों को चौंकाने ये काफी है.
ज़ी एंड डू
हिंदी की तरह जर्मन भाषा में भी आप और तुम का बड़ा फर्क है. इस समझने के लिए भाषा की बढ़िया जानकारी होनी ज़रूरी है. लेकिन हम आपको कुछ टिप्स देते हैं.
बर्लिन का विहंगम दृश्य
सामान्यतया ज़ी को हमेशा सरनेम के साथ बोला जाता है. उदारहरण के लिए हेर श्मित्ज़ (हेर पुरुषों के लिए, मिस्टर की तरह) या फ्राउ फिशर ( फ्राउ महिलाओं के लिए, मिस या मिसेज की तरह) बिजनेस के मामले में अक्सर जी का इस्तेमाल ही किया जाता है.
लेकिन जब आप ख़ुद का परिचय दे रहे हों तो या तो अपना पूरा नाम बताएं या फिर सरनेम. अपना सिर्फ फर्स्टनेम बताना ठीक नहीं माना जाता है.
डू यानी तुम का इस्तेमाल उम्र में छोटे लोगों, बच्चों या फिर दोस्तों के लिए किया जाता है. इसे फर्स्ट नेम के साथ पुकारा जाता है. लेकिन आप किसी को फर्स्टनेम से तब तक न पुकारे जब तक की सामने वाले ने आपको इसकी अनुमति ने दी हो या फिर जब तक वो ख़ुद आपको डू करके न पुकारे.
अक्सर बुज़ुर्ग या फिर बिजनेस के मामले में सीनियर लोग शुरुआत जी से करते हुए डू तक आ जाते हैं. वो ख़ुद का परिचय भी फर्स्टनेम से करवाते हैं,
अगर आप ये तय न कर पाएं कि जी या डू में से किसका इस्तेमाल किया जाए तो सामने वाले को सुने. वो वापसे जी या डू, जिस किसी भी तरीक़े से बात कर रहा है, वही आप भी इस्तेमाल करें.
टाइटल्स
हेर और फ्राउ, जर्मनी में बातचीत करते समय इनका ज़रूर ध्यान रखें. हालांकि कई बार आपको इनका उच्चारण अटपटा लगेगा लेकिन इनका इस्तेमाल करना न भूलें. अगर कोई डॉक्टर या प्रोफेसर भी है तब भी. जैसे मसलन, हेर डॉक्टर केलेर या फ्राउ प्रोफेसर फोन हेनकेल इसके अलावा डबल टाइटल में ही फ्राउ और हेर का इस्तेमाल होता है, जैसे फ्राउ प्रोफेसर डा शुमान.
वैसे जर्मन में गैर शादीशुदा महिलाओं यानी कुंवारियों के लिए एक अलग से शब्द है जिसे फ्राउलाइन कहा जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल भूल कर भी न करें. इसका इस्तेमाल बंद ही हो चुका है इसे फ्राउ के पीछे से हटा दिया गया है.
टाइम पर आना
जर्मनी समय की कद्र करने वालों का देश है. ये यहां सामान्य बात है. समय का पालन का करना सामाजिक ढर्रे में भी बेहद अहम है. बिजनेस मीटिंग या अन्य दूसरे ज़रूरी कामों के लिए ये ज़्यादा बेहतर है कि आप तय वक्त से कुछ मिनट पहले पहुंच जाएं. देर से आना या हांफते हांफते पहुंचने से सामने वाले पर अच्छा संदेश नहीं जाता है. ऐसी स्थिति में तो कतई नहीं जब आपके अलावा सभी समय से पहुंच गए हों.
दोस्तों के साथ मुलाकात में भी ये ज़रूरी है. फेशनेबली लेट होना भी जर्मनी में ख़राब माना जाता है. किसी जगह पर तयशुदा वक्त पर पहुंच जाए..वरना समय भी ख़राब होगा और लोगों को मूड भी.
बुलावे पर जाना
अगर आपको जर्मनी में कोई अपने घर रात के खाने या फिर दिन में काफी और केक के लिए बुलाए तो मेज़बान के लिए एक छोटा सा तोहफ़ा ज़रूर लेकर जाएं. फूल हमेशा पसंद किए जाते हैं. कई बार संख्याओं को शुभ अशुभ माना जाता है इसलिए कलियां विषम संख्या में लें. वाइन और कैंडी को भी एक बेहतर तोहफा माना जाता है.
रिसाइक्लिंग
जर्मनी में भिन्न किस्म के कूड़े को अलग अलग ढंग से फेंका जाता है. घरों या कई बार सार्वजनिक कूड़ेदानों में कांच. कागज़, पैकिंग या सब्ज़ी और खाने पीने की चीज़ें अलग अलग कूड़ेदानों में फेंकी जाती है. घरों में जैविक कूड़े के लिए अलग से डस्टबिन होता है.
ज़्यादातर जर्मन लोग इस बेहद गंभीरता से लेते हैं, हां अगर आप ऐसा नहीं करते तो आपको सामने वाले की नज़रों में अपने प्रति सम्मान कम ही दिखेगा.