1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

कहीं बारिश के बादल कहीं मंडराता संकट

भारत में मानसून आने में देरी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा पर चौबीस घंटे निगाह रखने के लिए भारत सरकार ने कृषि मंत्रालय में एक युद्ध-कक्ष की स्थापना की है. देश के अधिकांश भागों में फसल की पहली बुवाई बेकार चली गयी है.

बरसो बादल बरसो

स्थिति की गंभीरता को भांप कर फ्रांस और मिस्र की यात्रा पर जाने से ठीक पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में आठ मंत्रियों के एक समूह का गठन भी किया था.

इस मंत्रिसमूह को खाद्य सुरक्षा, खाद्यान्न की खरीद और उनके दाम तय करने का अधिकार होगा. यह समूह गेहूं और चावल के केंद्रीय भण्डार के प्रबंधन और खाद्यान्नों के आयात, निर्यात और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में निर्णय लेने के लिए भी स्वतंत्र होगा.

दरअसल अभी तक सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून का मसौदा तैयार नहीं कर पायी है इसलिए इस कानून के अर्न्तगत आने वाले विषयों पर यह मंत्रिसमूह ही फैसले लेगा.

इस समय स्थिति यह है कि देश के अधिकांश भागों में फसल की पहली बुवाई बेकार चली गयी है क्योंकि बारिश ही नहीं हुई. मणिपुर में तो स्थिति यहाँ तक बिगड़ चुकी है कि राज्य सरकार ने राज्य के सभी जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है.

स्थिति कितनी गंभीर है, यह जानने के लिए हमने कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि यदि अगले पांच-छह दिनों के भीतर मानसून ने ज़ोर नहीं पकड़ा तो हालात काफी ख़राब हो सकते हैं.

उनका कहना है कि यदि बारिश का यही हाल रहा तो देश की खाद्य सुरक्षा पर इसका बुरा असर पड़ेगा और कृषि उत्पादन में पच्चीस प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है.

शर्मा का मानना है कि ऐसी स्थिति में विशेषाधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है क्योंकि उसे आयत निर्यात की नीतियों में फेरबदल करने के निर्णय लेने पड़ सकते हैं.

रिपोर्ट- कुलदीप कुमार, नई दिल्ली

संपादन- एस जोशी

अन्य खबरें