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गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में अमेरिका को घेरेगा ईरान

२५ अगस्त २०१२

ईरान अगले महीने होने वाले गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन की तैयारियों में जुटा है. उसे उम्मीद है 120 सदस्यों वाले गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन को अमेरिका के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चाबंदी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

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तस्वीर: Ilna

सम्मेलन से पहले ईरान का दावा किया है कि अमेरिका लाख कोशिशों को बावजूद उसे विश्व समुदाय से अलग नहीं कर सका. अभी तक 30 देशों के प्रतिनिधियों का इस सम्मेलन में हिस्सा लेना तय माना जा रहा है. सीरिया को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है. इस बात के कयास लगा जा रहे हैं कि सीरिया के संकट को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद पैदा हो सकता है.

इस बार के गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन में भारत की मौजूदगी भी चर्चा का विषय है. भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक देशों में से एक था लेकिन अमेरिका के साथ भारत की नजदीकी ईरान भारत की दोस्ती के रास्ते में रुकावट बन रही है. भारत की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं. मध्य पूर्व के मामले के जानकार कमर आगा कहते हैं, " भारत का ईरान के साथ राजनीतिक संबंध नहीं है. इसके अलावा भारत की हमेशा से ये नीति रही है कि वो अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब के नीतियां बनाता है. भारत को 10 प्रतिशत का आर्थिक विकास बनाए रखने के लिए, हालांकि अब उतना नहीं रह गया है, ऊर्जा की जरूरत पड़ती है. ईरान से भारत ने तेल की सप्लाई में कमी की है. इसकी सराहना पश्चिमी देशों खासतौर से अमेरिका ने भी की है."

आयोजक ईरान

अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप पहले भी लगाता रहा है लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका का रवैया ज्यादा आक्रामक हुआ है. ईरान की कोशिश होगी कि इस सम्मेलन के बहाने वो अमेरिकी दबाव का कूटनीतिक जवाब दे सके. आयोजक देश होने की वजह से ईरान को सम्मेलन का पहला मसौदा तैयार करने और इसका अंतिम मसौदा तैयार करने का मौका मिलेगा. माना जा रहा है कि ईरान परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, ईरान के प्रति इस्राएल की धमकियों और फिलीस्तीन पर इस्राएल के कब्जे के बारे में बयान शामिल कर सकता है. जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के प्रो वली नस्र कहते है, "ईरान में इसे आयोजित करने का मतलब है ईरान कूटनीतिक अलगाव को तोड़ने की कोशिश करेगा."

हालांकि जानकारों का मानना है कि विश्व के ताकतवर देशों के प्रभुत्व के खिलाफ 60 के दशक में शुरु हुआ ये आंदोलन अब ज्यादा प्रासंगिक नहीं रह गया है. शीत युद्ध की समाप्ति के साथ ही इसका महत्व भी समाप्त हो गया है. इस बार गुट निरपेक्ष देशों का सम्मेलन अचानक महत्वपूर्ण हो गया है. अरब क्रांति के बाद मिस्र की सत्ता संभालने वाले मोहम्मद मुर्सी इसमें शिरकत कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के अधयक्ष बान की मून भी इसमें शामिल होंगे. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अल खुमैनी के संबोधन से इसकी शुरुआत होगी.

वीडी (रॉयटर्स)