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मजाक का पात्र बने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

२६ जून २०१२

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ जनता के बीच मजाक का पात्र बन गए हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनका खूब मजाक उड़ाया जा रहा है. कोई उन्हें 'किराये' का प्रधानमंत्री कह रहा है तो कोई 'राजा रेंटल' पुकार रहा है.

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तस्वीर: picture alliance/dpa

राजा परवेज अशरफ के प्रधानमंत्री बनने को उनके समर्थक लोकतंत्र की जीत करार दे रहे हैं. तो विरोधियों ने उन्हें व्यंग्य और मजाक का केंद्र बना रखा है. सुप्रीम कोर्ट में चल रहे रेंटल पावर केस को लेकर लोग उन्हें 'राजा रेंटल' कह रहे हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विवर एक एक यूजर ने लिखा, "राजा परवेज अशरफ प्रधानमंत्री बन गए हैं. मैं गंभीरता से सोच रहा हूं कि बिजली का जनरेटर खरीद लूं."

फेसबुक और ट्विटर पर कई ऐसे कार्टून शेयर हो रहे हैं जिनमें प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाया जा रहा है. लोगों ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उनकी पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी पर भी खूब व्यंग्य कसे हैं. अशरफ ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले पीपीपी की पूर्व नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की मजार पर श्रद्वाजंलि दी. बाद में वह पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर गए. विरोधियों को यह रास नहीं आया. उन्होंने ताना कसा कि पहले बेनजीर की मजार पर जाकर राजा ने बता दिया कि प्रधानमंत्री का कायदे आजम कौन है.

एक पोस्टर में तो यह लिखा गया है कि, "अंधेर नगरी चौपट राजा." ट्विटर पर एक सर्वे का हवाला देते हुए लिखा गया है कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ऊर्जा संकट हल करने में राजा सफल नहीं होगें. राजा के मुस्कुराते हुए एक पोस्टर के नीचे लिखा है, 'जरा फिर से कहना.'

फेसबुक पर एक तस्वीर डाली गई है. इसमें राष्ट्रपति जरदारी राजा को शपथ दिला रहे हैं. नीचे लिखा है, "मैं तहे दिल से वादा करता हूं कि जैसा आप कहेंगे, वैसा ही करूंगा. अगर कोई स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने को भी कहेगा तो मैं बिल्कुल नहीं लिखूंगा.".
इसी तरह यूट्यूब पर भी राजा के पुराने वीडियोज की बाढ़ आ गई है. कई वीडियोज में आवाज डब कर नए प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाया गया है.

एक पत्रकार फारुख खान कहते हैं कि अगर राजा साहब की अपनी छवि ठीक नहीं है तो इसमें ट्विटर का क्या कसूर है. सोशल मीडिया के माहिर सलमान आबिद का कहना है कि पाकिस्तान में सोशल मीडिया जितनी तेजी से तरक्की कर रहा है, उससे भी ज्यादा तेजी से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाये जा रहे हैं.

रिपोर्ट: तनवीर शहजाद, लाहौर

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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