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दुनिया

अमेरिकी सैनिकों के हत्यारे को उम्र कैद

जर्मनी में एक अदालत ने फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर दो अमेरिकी सैनिकों को मारने वाले हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा दी है. हत्यारे ने अपराध कबूल कर लिया है. इसे जर्मनी का पहला जिहादी हमला बताया गया था.

कोसोवो के 22 साल के आरिद उका ने पिछले साल फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों की एक टुकड़ी पर गोली चलाई थी. इसमें 25 वर्षीय निकोलस आल्डेन और 21 वर्षीय जखारी रायन कडबैक मारे गए और दो अन्य जवान घायल हो गए. अमेरिकी सैनिक तैनाती के लिए अफगानिस्तान जा रहे थे. अभियोक्ताओं का मानना है कि उत्तरी कोसोवो में पैदा हुआ और फ्रैंकफर्ट में पला बढ़ा उका किसी आतंकवादी गुट में शामिल नहीं है और उसने अकेले अपराध किया.

फ्रैंकफर्ट की क्षेत्रीय अदालत के जज थॉमस जागेबील ने फैसला सुनाते हुए कहा, "अभियुक्त को हत्या के दो मामलों और हत्या की कोशिश के तीन मामलों के लिए आजीवन कैद की सजा दी जाती है." हरी पैंट और काली जर्सी पहने उका अदालत में शांत नजर आ रहा था और कभी कभी मुस्कुरा भी रहा था.

जज जागेबील ने अदालत से कहा, "अभियुक्त ने तीसरे जवान पर भी गोली चलाई होती लेकिन उसका हथियार जैम हो गया." मुकदमा शुरू होने पर उका ने अपने शिकारों और उनके परिवार वालों से माफी मांगी थी और कहा था, "2 मार्च को मैंने दो लोगों को मार डाला और तीन पर गोलियां चलाईं. आज मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैंने ऐसा क्यों किया."

उसने कहा कि वह इंटरनेट में एक वीडियो देखकर प्रभावित हो गया, जिसमें अमेरिकी सैनिकों को कथित रूप से एक स्थानीय महिला का बलात्कार करते दिखाया गया था. उका के वकील मिषाएला रोथ ने उसके अपराध से इनकार नहीं किया लेकिन कहा कि उसे 15 साल बाद जेल से छोड़े जाने की संभावना दी जानी चाहिए.

रोथ ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान कहा कि एक जिहादी कभी भी अपने कृत्य के लिए माफी नहीं मांगेगा जैसा कि उका ने पहले दिन से ही किया है. बचाव पक्ष के वकील ने यह दलील भी दी कि वीडियो से उका के बचपन का सदमा भी लौट आया था जिसके साथ 6 साल की उम्र में बलात्कार हुआ था.

जर्मनी ने अमेरिका के नेतृत्व में इराक में 2003 में हुए हमले का विरोध किया था लेकिन अफगानिस्तान में उसके 5000 सैनिक तैनात हैं. इस दौरान जर्मनी में इस्लामी कट्टरपंथियों का कोई हमला नहीं हुआ लेकिन बम हमलों की कई योजनाओं को विफल कर दिया गया है. 9/11 के हमले की कुछ तैयारी जर्मन शहर हैम्बर्ग में भी हुई. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर टकराने वाले पहले जहाज का हाइजैकर मोहम्मद अता वहीं रहता था. मार्च 2010 में चार कट्टरपंथियों को जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों पर हमले की योजना बनाने और दूसरा 9/11 करने का सपना देखने के कारण जेल की सजा दी गई.

रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा

संपादन: ए जमाल

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