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दुनिया

भारत का बजट 16 मार्च को, विकास दर घटी

भारत में चुनावों की वजह से सालाना बजट 16 मार्च को ही पेश किया जाएगा, जबकि मौजूदा साल में विकास दर घट कर 6.9 फीसदी ही रह जाएगी. पिछले साल का आर्थिक विकास 8.4 प्रतिशत आंका गया था.

आम तौर पर भारत में बजट सत्र की शुरुआत फरवरी के तीसरे हफ्ते में होती है लेकिन इस साल कई राज्यों में उस वक्त चुनाव चल रहा है. ऐसे में बजट सत्र 12 मार्च को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के अभिभाषण के साथ शुरू होगा. इसके बाद 14 मार्च को रेल बजट पेश किया जाएगा, जबकि 15 मार्च को आर्थिक सर्वे संसद में रखा जाएगा.

संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया, "हमने राष्ट्रपति से सिफारिश की है कि सत्र की शुरुआत 12 मार्च से की जाए और यह 30 मार्च तक चले. रेल बजट 14 मार्च को और आम बजट 16 मार्च को पेश किया जाए." इस बारे में संसदीय मामलों की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को फैसला किया गया. इस बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने की.

30 मार्च को बजट सत्र का पहला हिस्सा खत्म हो जाएगा. इसके तीन हफ्ते बाद 24 अप्रैल से 22 मई तक दोबारा सत्र चलाया जाएगा. उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव की वजह से बजट सत्र को देर से शुरू किया जा रहा है. चुनाव नतीजे छह मार्च को घोषित किए जाएंगे.

वित्त मंत्री के तौर पर पांचवां बजट पेश कर रहे प्रणब मुखर्जी को घटे हुए विकास दर का सामना करते हुए अगले साल का बजट पेश करना है. इसके अलावा उन्हें लगातार बढ़ रहे वित्तीय घाटे पर भी जवाब देना पड़ सकता है.

मुखर्जी ने 6.9 फीसदी के विकास दर के अनुमान पर निराशा जताई है. उनका कहना है कि औद्योगिक उत्पादन और निवेश में आई कमी की वजह से ऐसा होता दिख रहा है. वित्त मंत्री ने कहा, "हाल के विकास को देखते हुए मौजूदा वित्तीय साल के आंकड़ों पर नजर डालते हुए हमें निराशा हो सकती है. लेकिन वैश्विक स्थिति को देखते हुए और घरेलू स्तर पर औद्योगिक मंदी के मद्देनजर इस पर आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए."

इस बार का विकास दर अनुमान पिछले तीन साल में सबसे कम है. मुखर्जी का कहना है कि पिछले तीन महीनों में निवेशकों का भरोसा लौटा है लेकिन यह अभी भी चिंता का विषय है. भारत में हाल के घोटालों के सामने आने के बाद कई विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजार से हाथ खींच लिए हैं. इसमें 176 अरब रुपये का टेलीकॉम घोटाला भी शामिल है, जिसके सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं. इसमें कई विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं.

वित्त मंत्री का कहना है, "हमें दोनों बातों का ध्यान रखना है. एक तरफ तो विकास दर को ऊंचा बनाए रखना है और दूसरी तरफ यह भी ध्यान रखना है कि महंगाई ज्यादा न बढ़े."

रिपोर्टः एएफपी, पीटीआई/ए जमाल

संपादनः महेश झा

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