
सात फरवरी 1812, यह वह तारीख है जिसने दुनिया को चार्ल्स डिकेंस नाम का मशहूर लेखक दिया. किशोरावस्था में पॉलिश के डिब्बों पर लेबल चिपकाने वाले डिकेंस ने पहले उपन्यास में जब पॉलिश फैक्टरी का जिक्र किया तो लोग हैरान रह गए.
इंग्लैंड के दक्षिण पूर्वी तट पर बसे शहर पोर्ट्समाउथ में जन्मे चार्ल्स डिकेंस को आज अंग्रेजी के सबसे बड़े लेखकों में गिना जाता है. उनकी जीवनी लिखने वाली क्लेयर टोमालिन कहती हैं कि 200 साल बाद भी डिकेंस की लेखनी की तुलना किसी से नहीं की जा सकती, "उनमें गजब की ऊर्जा थी और वह असीम परिश्रम भी करते थे. उनके पहले तीन उपन्यास द पिकविक पेपर्स, ओलिवर ट्विस्ट और निकोलस निकेलबी किस्तों की तरह आए. जब वह द पिकविक पेपर्स आधा लिख चुके थे, तब उन्होंने ओलिवर ट्विस्ट लिखना शुरू हर दिया. इस तरह हर महीने वह दो किस्तों की तरह अलग अलग उपन्यास लिख रहे थे. क्या आप अब इसकी उम्मीद कर सकते हैं."
कलम का जादू
डिकेंस के उपन्यासों में उनके बचपन का अनुभव साफ झलकता है. उनका बचपन खुशी से कठिनाइयों की ओर बढ़ा. डिकेंस के पिता सरकारी क्लर्क थे. पैसा उनके हाथ में नहीं टिकता था. कर्ज न लौटा पाने की वजह से डिकेंस के पिता को जेल जाना पड़ा. आर्थिक संकट की वजह से उन्होंने जवानी में ही पॉलिश बनाने वाली फैक्टरी में काम करना शुरू कर दिया. वह पॉलिश के डिब्बों पर लेबल चिपकाते थे. पॉलिश फैक्टरी के अनुभवों को निचोड़ते हुए उन्होंने 1850 में पहला उपन्यास लिखा. डेविड कॉपरफील्ड नाम की इस रचना को आज भी उनके सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है. टोमालिन कहती हैं, "वह एक अद्भुत लेखक थे. शेक्सपियर के बाद वह चरित्रों को गढ़ने वाले सबसे बड़े लेखक हैं."
आम आदमी के डिकेंस
डिकेंस के प्रशंसकों के मुताबिक वह बेमिसाल ढंग से आम जिंदगी और आम लोगों की बात लिखा करते थे. यह बात कम लोग जानते हैं कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे. विलासिता और सुर्खियों से दूर उन्होंने लंदन में कमजोर महिलाओं के लिए फॉलन वीमन नाम का बसेरा भी तैयार किया. इस बड़े घर में उन्होंने यौनकर्मियों को पुरानी जिंदगी छोड़ जीवन का नया अध्याय शुरू करने के लिए प्रेरित किया. घर का खर्च डिकेंस ने खुद उठाया. इस दौरान उन्होंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी निभाते हुए 10 बच्चों की अच्छी परवरिश की, उपन्यास लिखे और कई कॉलेजों में लेक्चर दिए. 58 साल की उम्र में डिकेंस का निधन हो गया.
सोच विचार और लंबी खामोशी के बाद टोमालिन कहती हैं, "वह दिखाना चाहते थे कि आम लोग भी अमीरों, चर्चित और बड़े लोगों जितने ही दिलचस्प हैं. वह इसमें सफल भी हुए. उन्होंने लोगों को खूब हंसाया. साथ ही वह लोगों को रुलाना भी चाहते थे इसीलिए उन्होंने कई उन्यासों में डरावनी स्थिति डाली."
भारत के डिकेंस
डिकेंस भारत में भी काफी मशहूर हैं. भारत के कई स्कूलों में उनकी किताबें पाठ्यक्रम का हिस्सा है. डिकेंस ने जिस ढंग से उत्पीड़न, अन्याय और गरीबी को लेकर इंग्लैंड पर तंज किया, उसकी वजह से भी वह भारत में मशहूर रहे. कई भारतीय डिंकेस और भारत को दोस्त कहते हैं. भारत को ब्रिटेन से आजाद हुए 65 साल हो चुके हैं, इस बीच कई पीढ़ियां गुजर चुकी हैं, लेकिन डिकेंस की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है.
डिकेंस की 200वीं जंयति के मौके पर लंदन में मंगलवार को कई आयोजन हो रहे हैं. उनके शहर पोर्ट्समाउथ में स्ट्रीट पार्टी होगी. इसमें प्रिंस चार्ल्स भी शामिल होंगे. इस मौके पर हॉलीवुड के दिग्गज अदाकार राल्फ फिएंस भी रहेंगे. चार्ल्स डिकेंस के उपन्यास ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स पर बनाई जा रही फिल्म में राल्फ मुख्य अभिनेता है. फिलहाल फिल्म की शूटिंग चल रही है.
रिपोर्ट: एएफपी/ओ सिंह
संपादन: ए जमाल