इस्राएल के प्रधानमंत्री ने स्वेज नहर को टक्कर देने के लिए नई रेल योजना को मंजूरी दी. प्रस्तावित रेल मार्ग बिना स्वेज नहर के यूरोप और एशिया को जोड़ेगा. इससे यात्रा का समय घटेगा व पैसा भी बचेगा. भारत को भी फायदा होगा.
रेल मार्ग का एक सिरा भूमध्यसागर से शुरू होगा. आगे रेलवे लाइन लाल सागर की तरफ बढ़ेगी. इससे जहाजों की लंबी यात्रा के बजाए ट्रेन का तेज रफ्तार विकल्प उपलब्ध हो जाएगा. इस्राएली अधिकारियों ने रेलवे प्रोजेक्ट को 'मेड-रेड' रेलवे नाम दिया है. फिलहाल यूरोप और एशिया के बीच व्यापार स्वेज नहर के जरिए होता है. स्वेज नहर भूमध्यसागर और लाल सागर को जोड़ती है.
रविवार को कैबिनेट की साप्ताहिक बैठक के बाद इस्राएली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने योजना को हरी झंडी दी. नेतन्याहू ने कहा, "यह एक रणनीतिक फैसला है. आने वाले दशकों में नई ताकतें (आर्थिक) उभरेगीं. यह हमारी क्षमता के भीतर है कि हम स्वेज नहर के बजाए एक दूसरा परिवहन मार्ग बनाएं."
इस्राएल की कैबिनेट ने ध्वनिमत से योजना का समर्थन किया है. नेतन्याहू के मुताबिक योजना ने "भारत, चीन और अन्य उभरती ताकतों में दिलचस्पी पैदा कर दी है." इस्राएली प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक पहले चरण में पैसा जुटाने का काम होगा. इसके लिए तीन विकल्प हैं. पहला, इस्राएल और अन्य सरकारों के बीच समझौता किया जाए. दूसरा विकल्प है कि इस्राएल सरकार स्थानीय निवेशकों के साथ साझेदारी करे. पूरी सरकारी सहायता से रेल मार्ग बनाना, तीसरा विकल्प है.
परिवहन मंत्रालय चीन के साथ मिलकर साझा रूप से इस योजना को अमल में लाना चाहता है. परिवहन मंत्री यिस्राएल कैत्ज कहते हैं, "रेलवे तंत्र और परिवहन तंत्र बनाने में चीन की कंपनियों की पेशेवर क्षमता बहुत अच्छी है." कैत्ज चीन के परिवहन मंत्री से इस संबंध में मुलाकात भी कर चुके हैं. दोनों देश साझा प्रस्ताव तैयार करने पर सहमत हैं.
इससे भविष्य में भारत को भी फायदा होगा. भारत तक रेल मार्ग के जरिए गैस पहुंचेगी. इस्राएल ने बीते साल जून में गैस को दो विशाल भंडार खोजे हैं. अनुमान है कि तमार में 238 अरब घन मीटर और लेवियाथान में 450 अरब घन मीटर गैस है. इस्राएल गैस के इस अकूत भंडार का आर्थिक फायदा उठाना चाहता है. रेलवे के जरिए गैस आसानी से खरीदारों तक पहुंचाई जा सकती है.
रिपोर्ट: एएफपी/ओ सिंह
संपादन: एम गोपालकृष्णन