
ब्रिटेन में भारत को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोके जाने की मांग तेज हो गई है. भारत के फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफाल खरीदे जाने से ब्रिटिश नेता भड़के हुए हैं. प्रणब मुखर्जी के बयान ने नाराजगी को कई गुना बढ़ा दिया है.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भारत को दी जाने वाली आर्थिक सहायता के पक्ष में हैं. लेकिन अब उन पर इस मदद को रोके जाने के लिए अभूतपूर्व दबाव पड़ रहा है. मदद पर हो रही बहस को लड़ाकू विमानों की खरीद और भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बयान ने और भड़का दिया है. रविवार को ब्रिटिश अखबार संडे टेलीग्राफ ने एक खबर छापी. खबर के मुताबिक पिछले साल अगस्त में भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उनके देश को अब ब्रिटेन की मदद की जरूरत हैं. राज्य सभा में मुखर्जी ने इस मदद को 'मूंगफली के दाने' बताया.
मुखर्जी के बयान का यह बयान पहली बार ब्रिटिश मीडिया में सामने आया है. अखबार के मुताबिक बयान राज्यसभा की आधिकारिक तौर पर दर्ज कार्रवाई से लिया गया है.
दासो की राफाल
इस रिपोर्ट के अलावा ब्रिटेन की जनता भारत और फ्रांस के लड़ाकू विमान सौदे से भी नाराज है. भारत ने फ्रांस की कंपनी दासो के 126 राफाल फाइटर जेट खरीदने का फैसला किया है. सौदा करीब 12 अरब डॉलर का है. भारत ने राफाल को यूरोफाइटर टायफून पर तरजीह दी. टायफून जर्मनी, ब्रिटेन, सऊदी अरब, ऑस्ट्रिया, इटली और स्पेन ने मिलकर बनाया है. ब्रिटेन और जर्मनी को उम्मीद थी कि भारत टायफून खरीदेगा. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कैमरन और जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल भारत यात्रा के दौरान टायफून के लिए पैरवी भी कर चुके थे.
इसी हफ्ते राफाल सौदे की जानकारी मिलने के बाद भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री को उम्मीद थी कि भारत टायफून में दिलचस्पी दिखा सकता है. दासो और भारत के बीच अभी करार पर दस्तखत नहीं हुए हैं. कैमरन को लगा कि टायफून के लिए लगाई गईं उम्मीदें अब भी जिंदा हैं. लेकिन अब यह उम्मीद भी क्षीण हो रही है और नाराजगी उसकी जगह ले रही है.
शनिवार को भारत को दी जाने वाली आर्थिक मदद को लेकर ब्रिटिश अधिकारियों की एक बैठक भी हुई. अधिकारियों ने मदद बंद किए जाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि एक वक्त तक भारत को मदद दी जाने जरूरी थी, लेकिन अब इसे बंद किया जाना चाहिए.
ईएडीएस की यूरोफाइटर
प्रधानमंत्री कैमरन की भी आलोचना हो रही है. अंतरराष्ट्रीय विकास मामलों मंत्री एंड्र्यू मिचेल का कहना है कि भारत को मदद टायफून बेचने के इरादे से दी जा रही थी. हालांकि शनिवार शाम हुई बैठक में मिचेल ने मदद जारी रखने का जोरदार समर्थन किया.
विरोधियों का कहना है कि ब्रिटेन खुद आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा है. लिहाजा उसे खुद पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे प्रदर्शन की वजह इस आर्थिक मदद बंद किए जाने की मांग प्रभावशाली हो रही है. ब्रिटेन इस वक्त हर साल भारत को 28 करोड़ पाउंड की आर्थिक मदद देता है. एड प्रोग्राम के तहत ब्रिटेन अभी से 2015 तक भारत को कुल 1.4 अरब पाउंड की मदद देगा.
रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह
संपादन: एम गोपालकृष्णन