
माधुरी दीक्षित भले ही इन दिनों बॉलीवुड फिल्मों में नहीं दिखाई पड़ें, लेकिन उनके फैंस को उनकी चहेती सुपरस्टार लंदन के मैडम तुषाद म्यूजियम में दिखेंगी. म्यूजिम में हूबहू मुस्कुराती माधुरी दिखेंगी, लेकिन मोम की.
मैडम तुषास में शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, रितिक रोशन और सलमान खान पहले ही जगह बना चुके हैं. तेजाब, साजन, खलनायक, राम लखन, हम आपके हैं कौन और देवदास में अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जानी जाने वाली 44 साल की माधुरी भी अब लंदन में अपनी जगह मैडम तुषाद में बना रही हैं. ट्विटर में माधुरी ने लिखा, "मैडम तुषाद 7 मार्च को मूर्ति पेश कर रहा है. उस दिन मिलेंगे." इस वक्त माधुरी अपने पति श्रीराम नेने और दो बेटों के साथ मुंबई में रह रही हैं.
माधुरी की मोम की मूर्ति बनाने का एलान मोम संग्रहालय मैडम तुषाद ने इस साल जनवरी में किया. इसके लिए म्यूजियम 1.5 लाख पाउंड खर्च कर रहा है. इसे बनाने के लिए शिल्पकारों की पूरी टीम लाई जा रही है. इनके साथ मेक अप और हेयर स्टाइलिस्ट भी मूर्ति को बिलकुल माधुरी जैसा बनाने में मदद करेंगे.
ऐसे बनती हैं मोम की मूर्तियां
मैडम तुषाद में मूर्ति बनाने के लिए अदाकारों को भी खूब मेहनत करनी पड़ती है. उनके शरीर और चेहरे की सटीक नाप ली जाती है. 200 तस्वीरें ली जाती हैं. एक मूर्ति बनाने में करीब 350 घंटे लगते हैं. सबसे पहले इस्पात या किसी अय धातु का एक फ्रेम बनता है जिस पर चिकनी मिट्टी का लेप चढ़ता है. फिर एक आकार देकर इस पर फाइबर ग्लास चढ़ाया जाता है.
प्लास्टर से फिर चेहरे के अलग अलग भागों के 12 सांचे बनाए जाते हैं. लाख और जापानी मोम को मिलाकर 75 डिग्री सेल्सियस में गर्म किया जाता है और इन्हें चिकनी मिट्टी के सांचे में डाला जाता है. मोम के ठंडे हो जाने के बाद प्लास्टर को हटाया जाता है. इससे मूर्ति का सर साफ दिखने लगता है. अदाकारों से उनके बालों के सैंपल भी लिए जाते हैं और फिर उनके बालों से मिलते नकली बाल मूर्ति पर लगाए जाते हैं. एक एक बाल को बड़े ध्यान से लगाया जाता है. फिर बालों को काटकर, धोकर उन्हें स्टाइल किया जाता है.
किसी भी व्यक्ति की आंखें उसके चरित्र और स्वभाव का आईना होती हैं. मैडम तुषास की मूर्तियों भी आंखों पर खास ध्यान दिया जाता है. आंखों को बनाने में 14 घंटे लगते हैं. हर आंख को ध्यान से रंगा जाता है और आंखों में दिख रही नंसों को रेशम के पतले धागों से बनाया जाता है. दांतों को भी एक एक कर लगाया जाता है और उनके रंग पर खास ध्यान दिया जाता है.
रिपोर्टः पीटीआई/एमजी
संपादनः ओ सिंह