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विज्ञान

गेहूं का सत्यानाश कर देगी गर्मी

दुनिया जितनी गर्म होगी, पेट उतना खाली हो सकता है. अमेरिका का ताजा सर्वे बताता है कि जरूरत से ज्यादा गर्म माहौल में गेहूं की फसल समय से पहले पक जाएगी और इसकी वजह से पूरी पैदावार चौपट हो सकती है.

वैज्ञानिकों का हमेशा से कहना रहा है कि ज्यादा गर्मी की वजह से फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. अब स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सर्वे बताती है कि गेहूं की फसल पर इसका क्या असर पड़ सकता है. यह रिपोर्ट सोमवार को जारी हुई.

नेचर क्लाइमेट चेंज में छपी रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं जल्दी पकने लगेगा और इसमें हो सकता है कि 20 प्रतिशत कम वक्त ही लगे. इस मुद्दे पर रिसर्च करने के लिए डेविड लोबेल और उनके साथियों ने लगभग नौ साल तक गेहूं की फसलों की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया. उन्होंने 34 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर उग रहे गेहूं की तस्वीरें लीं.

लोबेल का कहना है, "यहां नई बात यह है कि फसलों पर गर्मी के असर को हम आंक सकते हैं. हमने यह देखने की कोशिश की कि क्या किसानों के खेतों में इसका कोई असर पड़ता है और अगर पड़ता है तो कितना व्यापक है. हमने देखा कि इसका बड़ा असर पड़ता है."

असर तो होगा

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पूरी दुनिया में बढ़ते तापमान का असर होने वाला है और फसलें भी इससे अछूती नहीं रह सकेंगी. दुनिया भर में मक्का के बाद गेहूं सबसे ज्यादा उगाया जाता है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर 2050 में दुनिया की आबादी को खाना खिलाना है, तो मौजूदा वक्त से 70 फीसदी ज्यादा फसल उगानी होगी.

दुनिया भर में करीब 22 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर गेहूं उगाया जाता है. कुछ राष्ट्रों में गेहूं से 50 फीसदी कैलोरी और 20 प्रतिशत प्रोटीन प्राप्त किया जाता है. दो साल पहले रूस में लगी आग की वजह से गेहूं की पैदावार को काफी नुकसान हुआ था और पूरी दुनिया में इसके दाम बढ़ गए थे.

बुआई में बदलाव

गेहूं की फसल पर तापमान का खासा असर पड़ता है. इसे आम तौर पर सर्दियों से पहले बोया जाता है और गर्मी आने से पहले काट लिया जाता है. लोबेल का कहना है कि उनकी रिसर्च से गेहूं की बुआई को लेकर कुछ बदलाव किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा, "तापमान एक बड़ा कारक होगा." उनका कहना है कि यह सोचना होगा कि क्या गर्मी से बचने के लिए फसल को तेजी से उगा लिया जाए.

लोबेल कहते हैं, "गेहूं पहले बोने को लेकर एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि उस वक्त गर्मियों की फसल लगी रहती है. आम तौर पर चावल. गेहूं बोने से पहले चावल को काटना होता है. इसलिए दुनिया के कई हिस्सों में चावल काटे जाने के कुछ दिनों बाद गेहूं की बुआई होती है." उनका कहना है कि सिर्फ भारी गर्मी ही कम पैदावार की वजह नहीं हो सकती लेकिन यह एक बड़ी वजह जरूर है.

ऑस्ट्रेलिया में 2010 में वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की, जिसका परिणाम यह निकला कि औसत तापमान से दो डिग्री ज्यादा तापमान वाले इलाकों में गेहूं की पैदावार लगभग आधी रह गई.

रिपोर्टः रॉयटर्स, एएफपी/ए जमाल

संपादनः आभा एम

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