11 सितंबर को अमेरिका पर हुए एक आतंकी हमले की कीमत दुनिया के लिए कितनी बड़ी होगी यह बीते 10 सालों में सबने देख लिया है. इस हमले ने सचमुच दुनिया हमेशा के लिए बदल दी पर क्या लादेन को मार कर अमेरिका ने इसका बदला ले लिया.
चेहरे पर शोक, आंखों में नमी और व्यवहार में गंभीरता के साथ अमेरिका में 9/11 की दसवीं बरसी पर मृतकों को श्रद्धाजंलि दी जा रही है. न्यूयॉर्क, पेनसिलवेनिया और वॉशिंगटन जैसे तेज रफ्तार शहर सहमे और सिसकते हुए थम गए हैं. (11.09.2011)
अमेरिका पर 9/11 को हुए आतंकी हमलों के बाद पिछले दस सालों में क्या बदला है? पहली नजर में बहुत कम, लेकिन हकीकत में बहत कुछ, कहना है डॉयचे वेले के मुख्य संपादक मार्क कॉख का. (11.09.2011)
11 सितंबर को जब न्यूयॉर्क पर हमला हुआ तब उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ड डब्ल्यू बुश फ्लोरिडा में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक स्कूल में थे. उनके साथ समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकार भी थे... क्या हुआ था तब? (11.09.2011)
9/11 के हमलों को एक दशक पूरा हो गया है. आज भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में प्लेन के घुसने और ताश के पत्तों की तरह पूरी इमारत के ढह जाने की तस्वीरें लोगों को बखूबी याद हैं. इस दर्द के साथ जिंदा है अमेरिका का ताज छिनने की कहानी. (11.09.2011)
11 सितंबर 2001 को अपने एफ-16 विमान में वॉशिंगटन के आसमान के चक्कर लगा रहीं एक पायलट कहती हैं कि वह अपना विमान किसी अगवा जहाज में मार देने को तैयार थीं क्योंकि उनके पास विमान में मिसाइल लोड करने का वक्त नहीं था. (11.09.2011)
न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराते विमानों की तस्वीर ने पूरी दुनिया को स्तब्ध किया और आने वाले कई दशकों के लिए टीवी की सबसे हैरतंगेज तस्वीरें बन गई. हमले ने हमेशा के लिए दुनिया बदल दी पर हॉलीवुड इससे बेअसर ही रहा. (03.09.2011)
मैनहटन की एक प्रयोगशाला में वैज्ञानिक 9 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों के अवशेषों को नाम देने की कोशिश में जुटे हैं. इन अवशेषों में से 40 फीसदी की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. (26.08.2011)
बहुत से दूसरे लोगों के विपरीत पुलिसकर्मी ग्लेन क्लाइन 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के जलते टावरों की ओर दौड़े थे. न कि अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागे थे. इस घटना ने उनका जीवन पूरी तरह से बदल दिया. (08.08.2011)
सउदी अरब को अमेरिका का रणनैतिक सहयोगी माना जाता है, लेकिन दूसरी ओर 9/11 के ज्यादातर हमलावर सउदी ही थे. अल कायदा को वित्तीय मदद भी सउदी अरब के चंदों से मिलती है. (04.08.2011)
11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले को फ्रित्स उरबाख ने एक पहरी के तौर पर एक जर्मन छावनी में टीवी पर देखा था. इसके बाद के सालों में उन्होंने आतंक के खिलाफ लड़ाई के तहत अफगानिस्तान में अपना जीवन दांव पर लगाया. (04.08.2011)
काबुल शहर के कार्ते सेह इलाके में अमीर भी हैं और गरीब भी. यहां संसद में यकीन रखने वाले लोग भी हैं और लोकतंत्र पर शक करने वाले भी. लेकिन अफगानिस्तान का युवा वर्ग पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है और बेहतर वक्त चाहत रखता है. (03.08.2011)
ओसामा बिन लादेन अब इतिहास बन चुका है. लेकिन उसकी जिंदगी अब भी एक रहस्य बनी हुई है. सीआईए के पूर्व कार्यकारी निदेशक ने डॉयचे वेले को बताया कि उसकी तलाश कितनी मुश्किल थी और तोरा बोरा की पहाड़ियों में क्या हुआ था. (09.08.2011)
इस्लामी आतंकवाद से निपटने के लिए यूरोपीय संघ ने सुरक्षा सहयोग बढ़ा दिया है लेकिन साथ ही अपने नागरिकों पर निगरानी भी बढ़ा दी है. इस सहयोग का समन्वय एक आतंकवाद निरोधी अधिकारी करता है. (04.08.2011)
अल कायदा सरगना ओसमा बिन लादेन सालों तक पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा रहा. इसने पश्चिमी देशों में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. (04.08.2011)
अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में 9/11 के हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धाजंलि दी गई है. जर्मन में धार्मिक ढंग से मृतकों को याद किया गया. फ्रांस में एफिल टावर के पास वर्ल्ड ट्रेंड सेंटर जैसा स्मारक बनाया गया.
11 सितंबर को जब न्यूयॉर्क पर हमला हुआ तब उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ड डब्ल्यू बुश फ्लोरिडा में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक स्कूल में थे. उनके साथ समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकार भी थे... क्या हुआ था तब?
9/11 के हमलों को एक दशक पूरा हो गया है. आज भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में प्लेन के घुसने और ताश के पत्तों की तरह पूरी इमारत के ढह जाने की तस्वीरें लोगों को बखूबी याद हैं. इस दर्द के साथ जिंदा है अमेरिका का ताज छिनने की कहानी.