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  • दिल ही तो है..

    दिल का दर्द

    दिल में उठते दर्द पर कई गाने बनें हैं, इसे प्यार का संकेत माना जाता है, लेकिन जनाब ध्यान दें, कहीं यह दर्द आपको महंगा ना पड़ जाए

  • दिल ही तो है..

    अनोखी मशीन

    मुट्ठी भर का दिल हर मिनट करीब 70 बार धक धक करता है और दिन भर में कम से कम 10,000 लीटर खून पंप कर पूरे शरीर में पहुंचाता है. वह भी सारा जीवन.

  • दिल ही तो है..

    डबल काम

    हमारा दिल दो पंपों से बना है. दाहिना हिस्सा फेफड़े तक खून पहुंचाता है, जहां उसे ऑक्सीजन मिलता है. बायां हिस्सा उतना ही खून शरीर की धमनियों में डालता है.

  • दिल ही तो है..

    धक धक

    हर हिस्से का एक एट्रियम होता है और एक चैंबर. रक्त प्रवाह एक ही ओर होता है. दाहिने, बाएं आलिंद, निलय और धमनियों के बीच बना वॉल्व उसे वापस आने से रोकता है.

  • दिल ही तो है..

    असली मेहनत

    दिल दरअसल मांसपेशी मात्र है, लेकिन एक विशेष तरह की. वह पैर और बांह की मांशपेशियों जैसा होता है. उसी तरह काम करता है लेकिन एक दूसरे से जुड़ा होता है और थकता नहीं.

  • दिल ही तो है..

    असली पेसमेकर

    दिल की धड़कन को आप रोक नहीं सकते, क्योंकि वह स्नायु से नहीं चलता. विशेष मांसपेशियां नियमित रूप से करंट पैदा करती है जिसके कारण दिल फैलता और सिकुड़ता है. ऐसा न होने पर कृत्रिम दिल लगाना पड़ता है.

  • दिल ही तो है..

    सांस उड़ जाए तो...

    दिल की धड़कन सामान्य न हो तो उसे आराम नहीं मिलता. तनाव में होने पर डिफीब्रिलेटर की मदद से उसकी उत्तेजना तोड़ी जाती है ताकि वह फिर से शरीर में खून पंप कर सके.

  • दिल ही तो है..

    जीवन रक्षक

    मरीज का दिल बहुत धीरे धड़कता हो तो कृत्रिम पेसमेकर से मदद मिलती है. 1958 में पहली बार पेसमेकर लगाया गया. वह करंट पैदा करता है और दिल की मांसपेशियों तक पहुंचाता है.

  • दिल ही तो है..

    खुला दिल

    ओपन हर्ट सर्जरी के लिए दिल को रोक देना पड़ता है. 50 के दशक में डॉक्टरों ने लाइफ सपोर्ट सिस्टम का आविष्कार किया जो ऑपरेशन के दौरान दिल और फेफड़े का काम संभालता है.

  • दिल ही तो है..

    नस से दिल तक

    आधुनिक चिकित्सा में सीना खोले बिना दिल की जांच या ऑपरेशन संभव है. डॉक्टर धमनी से होकर कैथेटर दिल तक ले जाता हैं और कंट्रास्ट एजेंट डालकर दिल का टेस्ट करते हैं.

  • दिल ही तो है..

    फोल्डिंग वॉल्व

    दिल का वॉल्व खराब हो जाए तो नया लगाना पड़ता है. इसके लिए सूअर का या धातु का कृत्रिम वॉल्व उपलब्ध है. अब फोल्डिंग वॉल्व बन गये हैं जिन्हें कैथेटर के जरिए लगाया जाता है.

  • दिल ही तो है..

    बंद नस

    कोरोनरी नसें दिल की मांसपेशियों तक रक्त यानि खाना और ऑक्सीजन पहुंचाती है. कोई नस बंद हो जाए तो मांसपेशियां मर जाती हैं. बाइपास सर्जरी से रक्त प्रवाह को ठीक रखा जाता है.

  • दिल ही तो है..

    जीवन रक्षक स्टेंट

    यदि दिल में खून पहुंचाने वाली नसें बंद हों तो डॉक्टर कैथेटर के जरिए वहां स्टेंट डाल कर बंद हिस्से को खोल देते हैं. धातु का यह खोल धमनी में सामान्य रक्त प्रवाह को संभव बनाता है.

  • दिल ही तो है..

    प्लास्टिक का दिल

    शोधकर्ता प्लास्टिक का दिल बना रहे हैं जिसे शरीर में लगाया जा सके. इसका बछड़े पर सफल टेस्ट हुआ है, लेकिन शरीर के जादुई अंग को प्लास्टिक से बदलना इतना आसान नहीं.

  • दिल ही तो है..

    दिल दा मामला

    पहला हार्ट ट्रांसप्लांटेशन 1967 में हुआ. अब तो यह आम बात हो गई है. हर साल दुनिया भर में हृदय दान करने वालों से मिले हजारों दिलों को नया शरीर मिलता है. नई जिंदगी.

  • दिल ही तो है..

    दान की जिंदगी

    दान में मिलने वाले दिल बहुत कम हैं. अगर दिल ठीक से काम नहीं कर रहा है तो मदद के लिए कृत्रिम दिल भी हैं. अपना दिल शरीर में रहता है और उसकी मदद एक पंप से होती है.

  • दिल ही तो है..

    ख्याल रखना

    अपने दिल का ख्याल रखें, नियमित रूप से टेस्ट कराएं और दिल में उठते दर्द को हरगिज नजरअंदाज ना करें.


    रिपोर्ट: महेश झा | संपादन: ईशा भाटिया