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आईपीएल की तरह फुटबॉल नहीं

१५ जुलाई २०१३

विश्व रैंकिंग में 146वें स्थान पर दबे भारत में फुटबॉल को चमकाने की कोशिश हो रही है. लेकिन क्लबों, पार्टनरों और प्रायोजकों में मतभेद ऐसे हैं कि बात नहीं बन रही. अब क्लबों ने आईपीएल जैसी फुटबॉल लीग के खिलाफ आवाज बुलंद की.

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तस्वीर: AP

भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) अपने व्यावसायिक सहयोगी आईएमजी रिलायंस के साथ मिलकर फुटबॉल लीग शुरू करना चाहता है. योजना के मुताबिक आठ शहरों के नाम पर टीमें बनाई जाएंगी. टूर्नामेंट जनवरी से मार्च के बीच होगा. अभी यह साफ नहीं हुआ है कि क्या इस लीग में मशहूर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी खेलेंगे.

इस बीच भारत के दिग्गज फुटबॉल क्लबों ने लीग में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है. क्लबों ने इसे घरेलू लीग के लिए खतरा बताया है. फर्स्ट लीग प्रोफेशनल फुटबॉल क्लब्स एसोसिएशन के प्रमुख राज गोमेज के मुताबिक, "हम नहीं मानते कि नई लीग भारतीय फुटबॉल के लिए फायदेमंद होगी."

गोवा के मशहूर क्लब चर्चिल ब्रदर्स की सीईओ वलांका अलेमाओ ने भी इसका विरोध किया है, "मैं नहीं समझ पा रही हूं कि एआईएफएफ क्यों नई लीग शुरू करना चाहता है. सत्र के बीचों बीच हम कैसे अपने खिलाड़ियों को दूसरे क्लब के लिए खेलने की अनुमति दे सकते हैं." अलेमाओ को तो यह भी आशंका है कि प्रस्तावित लीग से मौजूदा क्लबों की धीरे धीरे मौत हो जाएगी.

Indien Kalkutta Fußball
कोलकाता में फुटबॉल खेलते बच्चेतस्वीर: Durbar Mahila Samanvya Samit

लालच से दूर रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, "साझा लक्ष्य तो भारतीय फुटबॉल की बेहतरी का होना चाहिए. संन्यास ले चुके या कभी कभार खेलने वाले कुछ खिलाड़ियों के जरिए कुछ मिनट तक ध्यान खींचकर कैसे मदद की जा सकती है. सभी का भला इसमें है कि एक और टूर्नामेंट शुरू करने के बजाय एआईएफएफ फर्स्ट लीग को सुधारने की कोशिश करे."

एआईएफएफ महासचिव कुशल दास ने क्लबों की चिंता को फिजूल करार दिया है. दास को उम्मीद है कि नई लीग आराम से शुरू होगी, "मैं क्लबों से बात कर रहा हूं और हम मामलों को जल्द सुलझाने में कामयाब होंगे. हम सब फुटबॉल का भला चाहते हैं और आईएमजी रिलायंस फुटबॉल की बेहतरी के लिए ही यहां है. अगर भारतीय फुटबॉल के लिए कोई उम्मीद नहीं होती तो वो यहां होते ही नहीं."

दास के मुताबिक फर्स्ट लीग 10 साल से भी ज्यादा समय से है और अब तक दर्शकों और प्रायोजकों का ध्यान नहीं खींच सकी है, "नई लीग में इतनी क्षमता है कि वह भारतीय फुटबॉल के व्यावसायिक कद को उठा सके."

भारतीय फुटबॉल की दयनीय दशा किसी से छिपी नहीं है. सवा अरब की आबादी वाले देश में फुटबॉल क्रिकेट के सामने बौना नजर आता है. देश के कई कोनों में फुटबॉल खेली तो जाती है लेकिन अधिकारियों के पास प्रतिभाओं तक पहुंचने का वक्त नहीं है. ऐसी ही कई कमियों की वजह से ही फीफा की रैकिंग में भारतीय टीम 146वें स्थान पर है.

ओएसजे/एजेए (एएफपी)

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